सुभाष राज

नई दिल्ली. गोडावन संरक्षण के साथ अक्षय ऊर्जा परियोजनाओं की स्थापना में आ रही बाधाओं के निवारण के लिए राजस्थान के ऊर्जा राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) भंवर सिंह भाटी ने केन्द्रीय ऊर्जा मंत्री को महत्वपूर्ण सुझाव दिए। भाटी ने केंद्रीय मंत्री से राजस्थान में गोडावन के संरक्षण के साथ-साथ अक्षय ऊर्जा परियोजनाओं की स्थापना के लिए उच्चतम न्यायालय के आदेश के सम्बन्ध में स्पष्टीकरण/संशोधन हेतु भारत सरकार द्वारा पुनर्विचार याचिका में ढिलाई से हो रहे नुकसान का मुद्दा भी उठाया।

भाटी ने केंद्रीय मंत्री को अवगत कराया कि माननीय उच्चतम न्यायालय द्वारा गोडावन पक्षी के संरक्षण हेतु राजस्थान एवं गुजरात सरकार को निर्देशित किया है कि गोडावन के विचरण क्षेत्र, प्रॉयोरिटी एवं पोटेंशियल एरिया में सभी लो वोल्टेज लाइनों को भविष्य में भूमिगत रखा जाए एवं वर्तमान लो वोल्टेज लाइनों को भूमिगत किया जाये। सभी हाई वोल्टेज लाइनों पर तुरंत बर्ड डाइवर्टर लगाये जाने के साथ ही वर्तमान ओवरहेड लाइनों की फिजिबिलिटी स्टडी की जाये और यदि संभव हो तो लाइनों को भूमिगत किया जाये। जहाँ तकनीकी रूप से भूमिगत किये जाने में समस्या हो, तो सुप्रीम कोर्ट द्वारा गठित कमेटी से परीक्षण करवाया जावे तथा भविष्य में बनाई जाने वाली सभी ओवरहेड लाईनों की तकनीकी रिपोर्ट का परीक्षण भी कमेटी से करवाया जाये।

भाटी ने बताया कि पश्चिमी राजस्थान में अक्षय ऊर्जा देश की कुल संभावित क्षमता का 20 प्रतिशत है। साथ ही यह क्षेत्र गोडावन का निवास स्थल भी है, जो कि एक लुप्तप्राय पक्षी प्रजाति है। अब गोडावन के विचरण क्षेत्रा में प्रतिबंध एवं विधुत लाईनों को भूमिगत किये जाने से राज्य के वर्ष 2025 तक के घोषित अक्षय ऊर्जा लक्ष्य 37.5 गीगावाट एवं 2030 तक 450 गीगावाट के राष्ट्रीय लक्ष्यों की प्राप्ति पूरी तरह से प्रभावित होगी। इस निर्णय से लगभग 50-60 गीगावाट क्षमता की परियोजनाएं प्रभावित होंगी।

भाटी ने बताया कि लाइनों के भूमिगत किये जाने में विभिन्न प्रकार के तकनीकी, व्यावहारिक, सामाजिक, आर्थिक, वित्तीय एवं कानूनी समस्याएं हैं और यह अक्षय ऊर्जा क्षेत्र की वृद्धि को बुरी तरह प्रभावित करेंगे। अतः इस प्रकरण के स्पष्टीकरण/ संशोधन/ पुनर्विचार हेतु उच्चतम न्यायालय में पैरवी की जाये। केंद्रीय मंत्री ने भाटी द्वारा सुझाए गए सभी बिंदुओं पर सकारात्मक सहयोग देने का आश्वासन दिया तथा जल्द ही राजस्थान में ऊर्जा आपूर्ति के संकट का समाधान करने में हर संभव सहयोग देने की बात कही।

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