जयपुर. राजस्थान में सत्तारूढ़ कांग्रेस जल्द ही राजनीतिक नियुक्तियों की रेवडियां बांटेगी लेकिन उसमें अपनी नींव की ईंट कांग्रेस सेवादल को हिस्सा नहीं देगी। नियुक्तियों की मलाई वे खाएंगे जिन्होंने सरकार को गिराने अथवा बचाने की कोशिश करने वाले नेताओं का दामन थाम रखा है। इसके अलावा राष्ट्रीय नेताओं की मिजाजपुर्सी करने वाले भी इसमें हिस्सा बटाएंगे। विडम्बना ये कि इसके बावजूद कांग्रेस का शीर्ष नेतृत्व चुनाव के वक्त ये उम्मीद करेगा कि सेवादल कार्यकर्ता बूथ पर भाजपा के बूथ कार्यकर्ताओं से मुकाबला करने के लिए मैदान में उतरें।

ये उस बातचीत का सार है जो हिंदी हैडलाइन डाट काम ने प्रदेश सेवादल के अतिरिक्त मुख्य संगठक रहे और सेवादल के आल इंडिया इंस्ट्रक्टर बृजमोहन खत्री से की। लम्बे समय से देश भर में कार्यकर्ताओं को कांग्रेस की रीति—नीति से अवगत कराने के साथ ही उन्हें राजनीतिक मुकाबले के लिए तैयार करने में जुटे बृजमोहन खत्री ने सवालों के जवाब में कहा कि हाल ही एक युवा हेमसिंह शेखावत को सेवादल का प्रदेश नेतृत्व सौंपे जाने के बाद 25 दिन की यात्रा निकालकर किसानों के लिए राज्य भर से समर्थन जुटाया गया। जमीन पर पार्टी की आलोचनाओं का मजबूती से जवाब भी दिया गया। जहां तक सत्ता में हिस्सेदारी का सवाल है तो सेवादल के मुंह पर अनुशासन का ताला है। वह सिर्फ ये उम्मीद कर सकता है कि शायद इस बार नेतृत्व अपनी नींव की ईंट को नहीं भूलेगा।

प्राथमिकता मिलने पर होगा प्राणों का संचार

खत्री का कहना है कि राजनीतिक नियुक्तियों में प्राथमिकता मिलने पर सेवादल में प्राणों का संचार तो होगा ही साथ में उसके कार्यकर्ता पूरी ताकत से भाजपा तथा आरएसएस के दुष्प्रचार का मुकाबला भी करेंगे। जहां तक पद की लालसा का सवाल है तो नियुक्तियों में प्राथमिकता की आशा करना पद की लालसा नहीं है बल्कि पार्टी के तंत्र को मजबूती देने का एकमात्र रास्ता है और आज नहीं तो कल पार्टी को सेवादल की मजबूती पर ध्यान केन्द्रित करना ही होगा।

नेताओं का चाकर नहीं है कांग्रेस सेवादल

एक सवाल के जवाब में बृजमोहन खत्री ने कहा कि पार्टी नेताओं को अपनी ये सोच बदलनी होगी कि सेवादल कांग्रेस नेताओं का चाकर है। सेवादल कार्यकर्ता नेताओं का सेवक नहीं बल्कि कांग्रेस का आधार स्तम्भ है। वही एकमात्र ऐसा संगठन है जो पार्टी की रीढ़ को टूटने से बचा सकता है और गांव—गांव में सुप्त पड़े कार्यकर्ताओं में जोश भर सकता है। उनका कहना है कि राजस्थान के मुख्यमंत्री सेवादल की प्रशंसा तो खूब करते हैं लेकिन उसे धरातल पर मूर्त रूप क्यों नहीं देते, इसका जवाब सेवादल के पास नहीं है ?

सेवादल से कराई जाए पार्टी प्रवक्ताओं की ट्रेनिंग

पार्टी की दुर्दशा विशेषकर टीवी चैनलों की डिबेट में भाजपा प्रवक्ताओं से आए दिन मात खाने वाले कांग्रेस प्रवक्ताओं से जुड़े सवाल पर आल इंडिया इंस्ट्रक्टर ने कहा कि इसके लिए पार्टी को प्रवक्ताओं की ट्रेनिंग सेवादल से करानी चाहिए। सेवादल उन्हें पार्टी के इतिहास के साथ ही देश के लिए कांग्रेस के योगदान की जानकारी आंकड़ों के साथ देंगे। उनका दावा है कि प्रशिक्षण के बाद आंकड़ों और इतिहास की भरपूर जानकारी के साथ डिबेट में उतरने वाले प्रवक्ताओं को मुंह की नहीं खानी पड़ेगी।

राहुल मांग चुके हैं माफी

खत्री का कहना है कि कांग्रेस के राष्ट्रीय नेता राहुल गांधी दो साल पहले अजमेर में स्वयं ये मुहर लगा चुके हैं कि पार्टी ने सेवादल को उसकी सेवाओं का मोल नहीं चुकाया और वे इसके लिए सेवादल से माफी मांगते हैं। इसके बावजूद सेवादल को महत्व नहीं मिला। पार्टी नेताओं को उसकी याद तभी आती है जब वह सत्ता से बाहर हो जाती है।

सेवादल कार्यकर्ता करेंगे भाजपा की बूथ कमेटियों का मुकाबला

खत्री का कहना है कि नेपथ्य में रहकर पार्टी के लिए खून-पसीना बहाने वाले सेवादल ने तय किया है कि 2024 के चुनाव में भाजपा की बूथ कमेटियों का मुकाबला सेवादल कार्यकर्ता करेंगे और इसके लिए उन्हें प्रशिक्षण दिया जा रहा है। जहां तक सोशल मीडिया का सवाल है तो सेवादल में सोशल मीडिया विंग का गठन कर दिया गया है। विंग के कार्यकर्ताओं का प्रशिक्षण चल रहा है। जैसे ही प्रशिक्षण पूरा हो जाएगा तो देश देखेगा कि वे किस खूबी से भाजपा के दुष्प्रचार अभियान का मुकाबला करेंगे। खत्री का कहना है कि सेवादल के राष्ट्रीय अध्यक्ष लालजी भाई देसाई का सोशल मीडिया सेल गठित करने पर विशेष जोर हैं ताकि ताकि आगामी समय में सेवादल कार्यकर्ता सोशल मीडिया पर कमजोर साबित नहीं हों।

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