इंडोनेशिया में साकार हुई भारत की लोकोक्ति

नई दिल्ली. भगवान देगा तो छप्पर फाड़कर देगा। भारत में मशहूर इस लोकोक्ति ने इंडोनेशिया के एक गरीब की किस्मत को न सिर्फ बदलते देखा बल्कि उसे जीवन-यापन के लिए कामकाज तक करने की जरूरत नहीं रही।

छप्पर फाड़कर मिलने का ये वाकया इंडोनेशिया का है, जहां एक ताबूत बनाने वाले की तकदीर आकाश से गिरे एक चट्टानी टुकड़े ने बदलकर रख दी। हुआ यूं कि इंडोनेशिया के कोलांग शहर में रहने वाले जोशुआ हुटागालुंग ताबूत कारीगर हैं। कुछ दिन पहले दोपहर के वक्त तेज आवाज के साथ जोशुआ की छत में छेद हो गया। जोशुआ ने आंगन में एक गड्ढा देखा। गड्ढे में स्लेटी रंग का एक चट्टानी टुकड़ा पड़ा था।

4.5 अरब साल पुराना है पत्थर

33 साल के जोशुआ ने 2.1 किलोग्राम भारी टुकड़े के बारे में जानकारी जुटानी शुरू की। तभी उन्हें पता चला कि हजारों किलोमीटर दूर मेक्सिको में भी एक शख्स के साथ ऐसी घटना घटी। चट्टान का टुकड़ा ब्रह्मांड से गिरे किसी क्षुद्र ग्रह का टुकड़ा था। जांच में पता चला कि क्षुद्र ग्रह का टुकड़ा 4.5 अरब साल पुराना है। वह टुकड़ा 10 लाख पाउंड में बिका।

जोशुआ ने फेसबुक पर कुछ तस्वीरें पोस्ट की तो अमेरिकी क्षुद्र ग्रह विशेषज्ञ जैरेड कॉलिंस ने संपर्क किया। टुकड़ा 4.5 अरब साल पुराना होने की पुष्टि के बाद कॉलिंस ने उस टुकड़े को 10 लाख पाउंड कीमत देकर खरीद लिया। कॉलिंस ने क्षुद्र ग्रह के टुकड़े को एक अमेरिकी कलेक्टर को बेच दिया। फिलहाल उसे एरिजोना स्टेट यूनिवर्सिटी के मेटेराइट स्टडीज सेंटर में रखा गया है।

महासागरों में आए दिन होता है ऐसा

इंडोनेशिया नेशलल एयरोनॉटिक्स एंड स्पेस एजेंसी के अनुसार ये बहुत ही दुर्लभ घटना है। ज्यादातर उल्का पिंड आबादी से बहुत दूर महासागरों, जंगलों या फिर रेगिस्तानों में गिरते हैं। आम तौर अंतरिक्ष से हर दिन बड़ी संख्या में उल्का पिंड धरती की तरफ आते हैं। ज्यादातर छोटे पिंड पृथ्वी के वायुमंडल में दाखिल होते वक्त तेज घर्षण से पैदा होने वाली अथाह गर्मी में भस्म हो जाते हैं। कुछ ही पिंड या क्षुद्र ग्रहों के टुकड़े घर्षण और ताप के बावजूद पृथ्वी की सतह तक पहुंच पाते हैं।

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