प्रकृति के आगोश में हैं अनेक अजूबे

नई दिल्ली. आपने धरती के एक से दूसरे छोर तक की बिना रूके यात्रा करने वाले विमानों के बारे में खूब सुना और पढ़ा होगा लेकिन आप ये नहीं जानते कि प्रकृति ने अपने आगोश में ऐसे कई जीव छुपा रखे हैं जो सिर्फ सेक्स और खाने का आनन्द लेने के लिए उत्तरी और दक्षिण ध्रुव तक की यात्रा हर साल करते हैं। इनमें उड़ने वाले पक्षियों के साथ ही धीमी गति के लिए मशहूर कछुआ, पेंग्विन और मछलियां शामिल हैं।

छोटा है लेकिन दम बहुत है

धरती के एक से दूसरे छोर अर्थात उत्तरी से दक्षिणी ध्रुव तक की यात्रा करने वाला आर्कटिक टर्न नामका एक छोटा सा समुद्री पक्षी गर्मी के गुनगुने मौसम का आनंद लेने के लिए हर साल उडान भरता है। प्रत्येक साल बारी बारी से दोनों ध्रुवों में गर्मियां बिताने वाले पक्षी की एक ट्रिप करीब 35,000 किलोमीटर (21,748 मील) की होती है।

धारा के विपरीत तैरती है सालमन मछली

सालमन मछली बहुत लंबी दूरी तो तय नहीं करती लेकिन माइग्रेशन के लिए परिश्रम बहुत कड़ा करती है। नदी में पैदा होने वाली मछली बड़ी होने पर ज्यादातर जीवन समुद्र में बिताती है। लेकिन बच्चे देने की बारी आती है तो धारा से उलट तैर कर वापस नदी में आ जाती है।

दिन में सोकर रात में करते हैं 180 किमी की यात्रा

दिन भर अफ्रीका के शहरी इलाकों में लटके रहने वाले चमगादड रात होने पर खाने की तलाश में इतने दूर दूर की यात्रा करते हैं कि सूरज उगने से पहले एक ही रात में वे कई बार 180 किलोमीटर तक की दूरी तय कर लेते हैं।

तैरकर करती हैं अपना इलाज

ठंडे इलाकों में रहने वाली व्हेल मछलियां बच्चों को जन्म देने के लिए 18 हजार किलोमीटर तक की यात्रा कर गर्म मौसम की ओर जाती हैं। एक रिसर्च के अनुसार वे ठंड के कारण खराब हो गई अपनी त्वचा को बेहतर बनाने के लिए और संक्रमणों से बचने के लिए ये यात्रा करती हैं।

उडान में कमजोर नहीं है तितली

मोनार्क बटरफ्लाई 3 हजार किलोमीटर लंबी दूरियां तय कर अमेरिकी के उत्तरी इलाकों में पहुंचती हैं। फिर वहां ठंड बढ़ते ही उड़कर कैलिफोर्निया या मेक्सिको की ओर निकल लेती हैं।

दस हजार किमी चलता है लेदरबैक टर्टिल

लेदरबैक टर्टिल 10 किलोमीटर तक की यात्रा करते हैं। कनाडा से शुरु कर कैरिबियन और अलास्का से लेकर इंडोनेशिया तक अपनी यात्रा का वक्त और दिशा पता कर लेते हैं। कुछ वैज्ञानिकों का मानना है कि इसका राज कछुए के सिर के टॉप पर मौजूद उस बिंदु में छिपा हो सकता है जो उसे मस्तिष्क की पिनियल ग्रंथि से जोड़ती है।

सौ किलोमीटर तैरकर बच्चों को भोजन कराते हैं पेंग्विन

एम्परर पेंग्विन रहते और खाते पीते तो अंटार्कटिक सागर में हैं लेकिन अंडे देने के लिए करीब 100 किलोमीटर की यात्रा करते हैं। अंडों से बच्चे वहीं निकलते हैं और तब तक माता-पिता बारी बारी से इतनी लंबी यात्रा करके पहुंचते हैं और अपने पेट में भर कर लाई मछलियां उनके पास पहुंचने पर उगलते हैं।

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