नई दिल्ली. भीषण सर्दी से इंसान तो गर्म कपड़े पहनकर बच जाता है लेकिन पौधे और ध्रुवीय जीवों के पास ये सुविधा नहीं होती। ऐसे में वे सर्दी से कैसे बचाव करते हैं, ये जानना काफी दिलचस्प है।

सबसे पहले बात पेड़ों की, सर्दियों में पेड़ एनर्जी सेविंग मोड में चले जाते हैं। तापमान माइनस में जाने से जब पानी जमा जाता है तो नुकीली पत्तियों वाले पेड़ मोम जैसे आवरण से खुद को ढक लेते हैं। इससे उनकी ऊर्जा बची रह जाती है और वे आराम से सर्दियों में गर्मी का मजा लेते रहते हैं। जहां तक चौड़े पत्ते वाले पेड़ों का सवाल है तो वे सर्दियों की सुगबुगाहट होते ही पतझड़ शुरू कर देते हैं। वनस्पति विज्ञानियों के अनुसार पत्तियां पानी का वाष्पीकरण करती हैं, जिससे बचने के लिए ये पेड़ पहले ही पत्तियां गिरा देते हैं।

अब जीवों की बात। उत्तरी अमेरिका के पहाड़ों में रहने वाला चूहे जैसा दिखने वाला जीव पीका सर्दियां आने से पहले सूखी वनस्पतियां बिल में जमा कर लेता है और फिर पूरी सर्दी उन्हें खाकर गुजार देता है। ध्रुवीय इलाके आर्कटिक में रहने वाली आर्कटिक फॉक्स नामक लोमड़ी को बर्फ जैसे सफेद बालों का फर ढक लेता है। ये फर उसे गर्म तो बनाए रखता ही है, साथ ही आसानी से छुपकर शिकार में भी मदद करता है।

मारमोट और भूरे भालू समेत कई स्तनधारी सर्दियों से पहले गुफा या किसी पेड़ की खोखली ठूंठ खोज लेते हैं और सर्दी आते ही उसमें छुप जाते हैं। इसे उनकी शीत निद्रा कहा जाता है। शीत निद्रा के दौरान उनकी धड़कन और श्वसन प्रक्रिया धीमी हो जाती है जिससे उनकी ऊर्जा बची रहती है।

जहां तक छोटे कीटों का सवाल है तो उनके पास ना तो गर्माहट देने वाला फर होता है और ना ही वसा का भंडार। वैसे भी ज्यादातर कीटों में शरीर में पानी ज्यादा होता है, इसलिए वे इस पानी को जमने से बचाने के लिए शरीर से एंटीफ्रीज एजेंट निकालते हैं। ये एजेंट कीटों के शरीर में मौजूद पानी को बर्फ के क्रिस्टल में बदलने से रोक देते हैं।

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