नई दिल्ली. चीनी सीमा पर तनाव के चलते पिछले चार माह से भारत के लोग लद्दाख, कराकोरम, शिवालिक, पीरपंजाल जैसे नाम सुनते आ रहे हैं, लेकिन अधिकांश को इनके महत्व का सिर्फ इतना ही पता है कि वे बर्फ से ढके इलाके हैं और वहां पर्यटन का अलग ही महत्व है। वास्तव में बर्फ के नीचे रहने वाले ये इलाके भारतीय सेना की जान हैं। इन इलाकों पर काबिज होकर ही वह चीन जैसे खतरनाक दुश्मन और पिद्दी जैसे पाकिस्तान को काबू में रखती है।

अनछुए पहाड़ी सौंदर्य, खास संस्कृति और भौगोलिक स्थिति के कारण रणनीतिक महत्व वाला लद्दाख पहले जम्मू-कश्मीर राज्य का हिस्सा था और 31 अक्टूबर 2019 को उसे केंद्र शासित क्षेत्र में बदल दिया गया। लद्दाख की तरह शिवालिक और पीरपंजाल पर्वत भी हिमालय का हिस्सा है। हिमालय के इस क्षेत्र में भारत, चीन और पाकिस्तान की सीमाएं हैं। काराकोरम रेंज स्थित सियाचिन ग्लेशियर से नुब्रा नदी निकलती है। चीन और पाकिस्तान की तरफ से सियाचिन में घुसा जा सकता है।

लद्दाखी में मुरारी कहलाने वाली करीब 15,000 फीट स्थित खारे पानी की झील के आगे पैंगोंग सो झील है। इसी झील के इलाके में 1962 के भारत-चीन युद्ध लड़ा गया था। लद्दाख-तिब्बत के ठंडे रेगिस्तान में चारों ओर स्लेटी रंग और कहीं-कहीं थोड़ा हरा भी दिख जाता है। इस निर्जन इलाके में पेड़ नहीं हैं, ऑक्सीजन कम है, इसके बावजूद युद्ध की स्थिति ये अहम इलाका है।

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