इसलिए हमेशा आसमान में रहते हैं इसके दाम

नई दिल्ली. जाफरान की जिस महक से दिल खुश हो जाता है, मसालों के उस राजा की खेती बेहद कष्टकारी है क्योंकि फूलों से बड़ी सफाई के साथ निकाले जाने वाले तार टूटने पर उसकी कीमत आधी रह जाती है।
कश्मीर में केसर की खेती तीन इलाकों में होती है लेकिन घाटी के पंपोर इलाके में सबसे ज्यादा फसल के कारण इसे कश्मीर का केसर टाउन कहा जाता है। पुलवामा जिले में सालाना 60-80 क्विंटल उच्च क्वालिटी के केसर की खेती होती है। अच्छी क्वालिटी के एक ग्राम केसर के लिए बाजार में 250 से 300 रुपये तक मिलता है। केसर के पौधों में जब फूल लग जाते हैं तो उन्हें इकट्ठा किया जाता है।इन्हीं फूलों से केसर के तार निकाले जाते हैं।

इस साल से कश्मीर के केसर को जीआई टैग भी मिला है जो उसे दूसरे उत्पादों से अलग करता है और दार्जिलिंग चाय की तरह खास बनाता है। अक्सर कश्मीरी केसर के नाम पर कम क्वालिटी वाले केसर भी लोगों को बेच दिए जाते हैं। इसकी वजह से कश्मीरी केसर बदनाम हो रहा था। जीआई टैग मिल जाने से किसानों को माल बेचने में आसानी होगी। केसर के फूलों को चुनने का काम आसान नहीं। क्रोकस के छोटे फूलों को झुककर तोड़ने में कमर दुख जाती है।

कश्मीर के बड़गाम, श्रीनगर और डोडा में भी केसर होता है। इस बार पंपोर के केसर पार्क में केसर की टेस्टिंग और पैकेजिंग होगी। जाफरान दुनिया का सबसे महंगा मसाला है। इसकी वजह इसका कठोर परिश्रम से तैयार होना है। पांच ग्राम जाफरान पाने में केसर के 800 फूलों की जरूरत होती है।

भारत के अलावा स्पेन में करीब 1000 साल से केसर की खेती होती है। स्पेनी केसर को अजाफरान दे ला मांचा कहते हैं। भारत में केसर ईरानी लोग लेकर आए थे। ईरान अभी भी केसर का मुख्य उत्पादक है जहां दुनिया के 90 फीसदी से ज्यादा केसर का उत्पादन होता है। केसर के धागे फूलों से एक एक कर हाथों से निकाले जाते हैं।

Leave a comment

Your email address will not be published.