नई दिल्ली. आसमान का राजा कहलाने वाला ‘बाज’ आधुनिक तकनीक को भी धूल चटा देता है। दुनिया के कुछ देश बाजों का इस्तेमाल ड्रोन हमलों से बचने में कर रहे हैं। ये बाज ड्रोन को देखते ही उसे शिकार समझकर इस तरह झपटते हैं कि रिमोट संचालित ड्रोन सीधे धरती पर आ गिरता है। कई बार ‘बाज’ ड्रोन को पंजों में दबाकर कंट्रोल स्टेशन तक भी ले आते हैं। डच पुलिस ऐसे बाजों का परमाणु सयंत्रों की सुरक्षा के लिए​ पिछले कई साल से इस्तेमाल कर रही है।

……और जमीन पर आ गिरता है ड्रोन

एक रिपोर्ट के अनुसार बाज को प्रशिक्षण के दौरान ड्रोन को शिकार समझने की ट्रेनिंग दी जाती है। इसके लिए ड्रोन को पक्षियों की तरह उड़ाया जाता है। ज्ञात रहे कि बाज एक मात्र ऐसा पक्षी है जो आसमान में परवाज कर रहे बड़े से बड़े और ताकतवर से ताकतवर पक्षी को भी पंजों में दबाकर लम्बी उड़ान भर लेता है। हवाई पट्टियों पर मंडराने वाले पक्षियों को भगाने के लिए बाजों का उपयोग कई दशक से किया जा रहा है लेकिन अब वे खतरनाक ड्रोन से निपटने में भी काम आ रहे हैं।

ऐसा ही एक और सुपर सैनिक है कुत्ता। भारत सहित दुनिया की सबसे शक्तिशाली अमेरिकी सेना भी कुत्तों का इस्तेमाल अपने जवानों की सुरक्षा के लिए करती हैं। अभियानों के दौरान कुत्ते सैनिकों की रक्षा के साथ ही हमलावरों और गैर हमलावरों को अलग करने और शत्रुओं को तितर बितर करने में मदद करते हैं।

बारुदी सुरंगों का दुश्मन है 500 ग्राम का सैनिक

सुपर सैनिकों की सूची में बेहद छोटा सा जानवर चूहा भी शामिल है। असल में चूहों की नाक इतनी संवेदनशील होतली है कि वे मामूली सी गंध को भी सूंघ लेते हैं। इसी वजह से सेनाएं अभियानों के दौरान बारुदी सुरंगों से बचने के लिए चूहों का उपयोग करती हैं। चूंकि उनका वजन बेहद कम होता है, इसलिए उनके सुरंग तक पहुंचने से विस्फोट का खतरा ना के बराबर होता है। चूहों को प्रशिक्षण के दौरान बारुदी सुरंगों से निकलने वाली गंध को भोजन मानना सिखाया जाता है और इस प्रशिक्षण के बल पर वे बारुदी सुरंगों को खोज निकालते हैं। समुद्र के अंदर बिछाई गई सुरंगों का पता लगाने और उन्हें नष्ट करने के लिए दुनिया के कई राष्ट्र डाल्फिन को भी काम लेते हैं। इस काम में सील मछली भी मदद करती है।

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