सुनील शर्मा
जयपुर. दिन में सोने वालों को आयुर्वेद हिकारत की नजर से देखता है। उसका मानना है कि दिन में सोना शरीर के जेनेटिक्स को प्रभावित करता है। जेनेटिक्स ही इंसानी शरीर के वजन का बढ़ना अथवा घटना तय करते हैं। जबकि कई अध्ययनों में पाया गया कि सोने से वज़न नही बढ़ता बल्कि शरीर के विकास, रखरखाव, मरम्मत और जीवित रहने की प्रक्रिया बेहतर होती है। सोने के दौरान शरीर प्रतिदिन होने वाली कोशिकाओं की टूट-फूट की मरम्मत करता है। इसलिए ज्यादा सोने से वजन नहीं बढ़ता बल्कि कम नींद उसके लिए ज्यादा जिम्मेदार है।

अध्ययनों में पाया गया कि देर से सोना या नींद की कमी वजन बढ़ने का प्रमुख कारण है। नींद की कमी से हार्मोन उत्पादन धीमा हो जाता है। लेप्टिन और घ्रिलीन का स्राव ज्यादा होने लगता है जिससे ज्यादा भूख लगती है। यहां तक कि पेट भर जाने के बाद भी भोजन की इच्छा बनी रहती है।
निद्रा विशेषज्ञ सुझाते हैं कि दिन में 30-45 मिनट की नींद लेना फायदेमंद है, इससे तनाव के हार्मोन कम होते है और उत्पादकता बढ़ती है। जो लोग देर तक काम करते हैं, उन्हें दिन में एक झपकी लेने की जरूरत होती है ताकि वह दुर्घटना या काम पर किसी समस्या से बच सकें।

दोपहर का भोजन करने के 1-2 घंटे के अंदर ना सोएं, इससे पाचन-क्रिया धीमी पड़ जाती है और सीधा लेटने के कारण एसिड रिफ्लेक्स की संभावना बढ़ती है। इसलिए खाने और सोने के बीच के अन्तराल को ठीक रखें।

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