भारत बायोटेक के सीएमडी का दावा

नई दिल्ली. कोरोना टीका ‘कोवैक्सीन’ बनाने वाली भारत बायोटेक पर भरोसा किया जाए तो ऑक्सफोर्ड-एस्ट्राजेनेका की कोविशील्ड के साइड इफेक्ट इतने ज्यादा हैं कि वैक्सीन लेने वाले ‘सब्जेक्ट'(इंसान) को पैरासिटामोल देकर उन काबू पाया गया।

भारत बॉयोटेक के अध्यक्ष और प्रबंध निदेशक डा. कृष्णा इल्ला ने ये दावा सोमवार को एक वर्चुअल प्रेस कांफ्रेंस में किया। इल्ला ने कहा कि ऑक्सफोर्ड-एस्ट्राजेनेका की कोविशील्ड वैक्सीन परीक्षण का तरीका आलोचनाओं के घेरे में है क्योंकि उसने टीके की खुराक देने के बाद सब्जेक्ट को चार ग्राम पैरासिटामोल की खुराक भी दी।

भारत में होते ऑक्सफोर्ड-एस्ट्राजेनेका जैसे ट्रायल तो बंद हो जाती कम्पनी

ऑक्सफोर्ड वैक्सीन ट्रायल पर इल्ला ने कहा कि इसे इस तरह समझा जा सकता है कि अगर ऑक्सफोर्ड-एस्ट्राजेनेका जैसे ट्रायल किसी भारतीय कम्पनी ने किए होते तो भारत के ड्रग कंट्रोलर जनरल ने उस कम्पनी को बंद कर दिया होता।

क्लीनिकल ट्रायल के ऑक्सफोर्ड पैटर्न पर इल्ला ने कहा कि प्रतिकूल प्रतिक्रियाओं को दबाने के लिए प्रतिभागियों को चार ग्राम पैरासिटामोल की खुराक दी गई। जबकि हमारी कम्पनी ने ऐसी कोई चीज सब्जेक्ट को नहीं दी है।

इल्ला का दावा है कि उनकी कंपनी ने लगभग 25,000 प्रतिभागियों पर परीक्षण का बेहतर सेफ्टी डाटा दिया है। वे अपनी कम्पनी की वैक्सीन के 50 प्रतिशत के निर्धारित मानक से ऊपर प्रभावकारिता पाए जाने के प्रति आश्वस्त हैं।

टीके का प्रभावकारिता यानी एफिकेसी डाटा फरवरी-मार्च तक मिल जाएगा। इल्ला ने बताया कि कंपनी ने 50 लाख खुराक सेंट्रल ड्रग लैबोरेटरी कसौली में परीक्षण के लिए भेजी हैं। किसी भी टीके को इस्तेमाल के लिए जारी किए जाने से पहले उसका कसौली में परीक्षण अनिवार्य है।

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