कांग्रेस की समझौता बैठक का निचोड़

नई दिल्ली. कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी की सदारत में शनिवार को हुई बैठक में पार्टी की बेहतरी के मुद्दों के अलावा आरएसएस भी चर्चा का विषय था। बैठक में पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने पार्टी नेताओं को याद दिलाया कि राजस्थान और मध्यप्रदेश की ब्यूरोक्रेसी में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) पूरी तरह घुस चुका है और इन राज्यों के पार्टी नेताओं को इस पर ध्यान देने की जरूरत है।

पार्टी सूत्रों के अनुसार राहुल का कहना था कि जमीनी स्तर पर ये देखना होगा कि आखिर हमारी हार की वजह क्या है? पार्टी के वरिष्ठ नेताओं के प्रति सम्मान दर्शाते हुए राहुल ने कहा कि उन्होंने बचपन से इन नेताओं को अपने पिता राजीव के साथ काम करते देखा है, इसलिए उनके प्रति असम्मान दर्शाने का सवाल ही पैदा नहीं होता। राहुल ने राज्यों में उन पार्टियों के साथ समझौते के पालन पर भी जोर दिया जिनके साथ कांग्रेस का गठबंधन है। बैठक में वे 23 नेता भी शामिल थे, जिन्होंने पार्टी में बदलाव के लिए सोनिया गांधी को पत्र लिखा था।

बैठक में शामिल नेताओं ने राज्य इकाइयों को अधिक स्वतंत्र बनाने की वकालत की और कहा कि पार्टी महासचिव और राज्यों के प्रभारी हस्तक्षेप कम करके संगठन की मजबूती पर ध्यान केन्द्रित करें तो लड़खड़ा रहे संगठन को मजबूती मिलने लगेगी। सूत्रों के अनुसार पार्टी महासचिव प्रियंका गांधी ने भी इससे सहमति जताई और कहा कि पंचायत स्तर तक जाने की कोशिश उन कार्यकर्ताओं को वापस पार्टी मंच पर लाने में मदद कर सकती है, जो किन्हीं कारणवश निष्क्रिय हो गए हैं।

सूत्रों का कहना है कि बैठक में राहुल ने पार्टी के वरिष्ठ नेताओं से कहा कि वे उनके अनुभवों का लाभ लेना चाहते हैं और उनकी नजर में वे सभी पार्टी की सम्पत्ति हैं। बैठक में शामिल एक नेता के अनुसार राहुल गांधी का वरिष्ठों के प्रति सम्मान दर्शाना इस बात का द्योतक है कि वे पार्टी में युवा बनाम बुजुर्ग टकराव को टालने के इच्छुक हैं।

उल्लेखनीय है कि राहुल गांधी के नजदीकी युवा नेता लगातार इस तरह के संकेत देते रहे हैं कि राहुल बुजुर्ग नेताओं को कम पसंद करते हैं। इससे पार्टी में सीधे-सीधे युवा बनाम बुजुर्ग गुट बन गए जिसका खामियाजा पार्टी को उठाना पड़ा है।

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