जयपुर. विश्व की प्रतिष्ठित कालीन कम्पनियों में से एक जयपुर रग्स बुनकरों के अलावा अब राजस्थान की तीन जेलों को भी रोजगार देगी। जयपुर सेंट्रल जेल, बीकानेर सेंट्रल जेल और दौसा सेंट्रल जेल के करीब Prisoners Will Rug weaving: 100 कैदियों कालीन बुनाई कला सिखाई जा रही है।

अपराध से होने वाले नुकसान की भरपाई भी करेंगे कैदी

जयपुर रग्स संस्थापक एन के चौधरी के अनुसार Prisoners Will Rug weaving: कैदियों को गलीचा बुनाई का प्रशिक्षण दिया जा रहा है। गलीचा बुनाई से होने वाली इस कमाई का 75 प्रतिशत कैदियों को और 25 प्रतिशत उन परिवारों को जाएगा जिन्हें कैदी के अपराध की वजह से नुकसान उठाना पड़ा है। जयपुर सेंट्रल जेल के अधीक्षक के अनुसार जयपुर रग्स ने कैदियों के बैंक खाते खुलवाए हैं जिनके माध्यम से उनकी कमाई उनके परिवारों तक आसानी से पहुंच जाती है।

जयपुर रग्स इसके लिए जेलों में प्रशिक्षण कार्यशालाओं का आयोजन कर रहा है। रग्स का मानना है कि इससे कैदियों का सामाजिक-आर्थिक विकास होगा और रिहा होने के बाद उन्हें रोजगार का स्थायी जरिया मिल जाएगा।

स्क्रेप से बनाएंगे गलीचे

राजस्थान के बुनकर दो लाख से अधिक गांठ देकर हाथों से गलीचा बनाते हैं। गलीचा सूत, ऊन और बेम्बू सिल्क के स्क्रैप से बनाए जाते हैं। उल्लेखनीय है कि राजस्थान की जेलों में Prisoners Will Rug weaving कैदी कई तरह का सामान बनाते हैं लेकिन उनके लिए बाजार की व्यवस्था करने में जेल ​विभाग विफल रहता है।

कैदियों के बनाए गलीचों के लिए बाजार उपलब्ध कराने आगे आई

ये पहली बार है कि कोई कम्पनी कैदियों के बनाए गलीचों के लिए बाजार उपलब्ध कराने आगे आई है। माना जा रहा है कि जयपुर रग्स की इस पहल से तीनों जेलों में सजा काट रहे उन सौ कैदियों को रिहा होने के बाद रोजगार की समस्या से जूझना नहीं पड़ेगा क्योंकि रिहा होने के बाद वे आसानी से बुनकर कर्म अपना सकते हैं।

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