जयपुर. बर्तनों का मनुष्य के स्वास्थ्य से सीधा सम्बन्ध होता है। खाना पकाने के दौरान भोजन बर्तन के सीधे संपर्क में आता है। इससे खाना जिस धातु के बर्तन में पकाया जाता है उस धातु का प्रभाव भोजन पर पड़ता है। यहां हम आपको बता रहे है विभिन्न धातुओं के बर्तनों से स्वास्थ्य पर पड़ने वाले प्रभावों के बारे में –

पीतल की खटाई और नमक से दुश्मनी

यह नमक और अम्ल के साथ प्रतिक्रिया करता है, इसलिए खट्टी चीजों का या अधिक नमक वाली चीजों को इसमें पकाना या खाना नहीं चाहिए, अन्यथा फूड पॉइजनिंग हो सकती है।

आर्गनिक एसिड मिल जाए तो जरूरत से ज्यादा मिल सकता है कॉपर

तांबे के बर्तनों का उपयोग पुराने जमाने से ही किया जाता रहा है, और यह भी पीतल की तरह ही अम्ल और नमक के साथ प्रतिकिया करता है। कई बार पकाए जा रहे भोजन में मौजूद ऑर्गेनिक एसिड बर्तनों के साथ प्रतिक्रिया कर ज्यादा कॉपर पैदा कर सकते हैं, जो नुकसानदायक हो सकता है।

अणु जल्दी गर्म होने से हानिकारक

एल्युमीनियम के बर्तनों का इस्तेमाल लगभग हर घर में होता है। गर्मी मिलने पर एल्युमीनियम के अणु जल्दी सक्रिय होते हैं और एल्युमीनियम जल्दी गर्म होता है। एल्युमीनियम के बर्तन में खाना पकाना स्वास्थ्य के लिए हानिकारक होता है। इसमें खटाई या अम्लीय सब्जियों, चीजों का प्रयोग नहीं करना चाहिए।

एकदम सेफ है स्टेनलेस स्टील

यह एक मिश्र धातु है जो लोहे में कार्बन, क्रोमियम और निकल मिलाकर बनाई जाती है। इसमें खाना पकाने या बनाने में सेहत को कोई नुकसान नहीं होता। इन बर्तनों का तापमान बहुल जल्दी बढ़ता है।

लोहे के बर्तनों का जवाब नहीं

भोजन पकाने और खाने के लिए लोहे के बर्तनों का उपयोग हर तरह से फायदेमंद होता है। इन बर्तनों में पकाए गए भोजन में आयरन की मात्रा अपने आप बढ़ जाती है और आपको उसका भरपूर पोषण मिलता है। जहां तक नॉन स्टिक का सवाल है तो उसका मतलब होता है, न चिपकने वाला। अर्थात ऐसे बर्तन जिनमें खाना चिपकता नहीं है और पकाने के लिए अधिक तेल या घी की आवश्यकता भी न हो।

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