नई दिल्ली. गैंगरेप के बाद महिला की हत्या के बाद फरार से पहले बदायूं ज़िले के उघैती थाने से मेवली गांव का मंदिर गांव के वाशिंदों की श्रद्धा का केन्द्र था। लेकिन इस वारदात के बाद गांव सदमे में है और कुछ कहने की स्थिति में नहीं है।

गांव वालों का कहना है कि मृतक अक़्सर मंदिर में पूजा करने आती थी। रविवार को मंदिर में जाना उसकी साप्ताहिक दिनचर्या का हिस्सा था। मृतक महिला आंगनबाड़ी में काम करती थी और घर का पूरा ख़र्च वही चलाती थी क्योंकि उसका पति मानसिक रूप से अस्वस्थ होने से कोई काम नहीं करता है।

मृतक के अठारह वर्षीय बेटे के अनुसार वे मां के शव को दरवाज़े पर छोड़ गए। पुजारी बोले कि कुएं में गिर गई थी। अगले दिन सुबह हम थाने गए और पुलिस को मामला बताया लेकिन पुलिस ने हमारी बात नहीं सुनी। परिजनों की शिकायत है कि पुलिस समय रहते कार्रवाई करती तो पुजारी उसी दिन पुलिस की गिरफ़्त में आ जाता, लेकिन पुलिस ने जानबूझकर पुजारी को भागने में मदद की।

पुलिस के रवैये का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि उघैती थाने के तत्कालीन थानेदार राघवेंद्र सिंह ने एफ़आईआर दर्ज करना तो दूर, फ़रियाद तक नहीं सुनी। पुलिस के उच्च अधिकारी स्वीकार कर रहे हैं कि स्थानीय पुलिस की लापरवाही साफ़ थी, इसी वजह से थानाध्यक्ष को निलंबित भी किया गया है।

अभियुक्त सत्यनारायण जिस मंदिर में पुजारी है, वह मेवली गांव के प्रवेश द्वार पर है। घटना के बाद मंदिर को सील कर दिया गया है और किसी को भी पुलिस के बनाए घेरे से अंदर जाने की इजाज़त नहीं है। गाँव के लोग इस मामले पर ज़्यादा कुछ बोलना नहीं चाहते लेकिन वे मंदिर के पुजारी पर लगे गंभीर आरोपों से सदमे में हैं।

मंदिर 50-60 साल पहले ठाकुर भूप सिंह ने मंदिर बनवाया था। उन्होंने क़रीब 20 बीघे ज़मीन मंदिर के ही नाम कर दी थी। अभियुक्त सत्यनारायण छह-सात साल से यहाँ पुजारी है। वह पूजा-पाठ के अलावा वह तंत्र-मंत्र और झाड़-फूँक भी करता था। मृत महिला के पति को मानसिक परेशानी थी, जिसके निदान की उम्मीद लिए वह पुजारी सत्यनारायण के पास आया करती थीं।

पुजारी सत्यनारायण के आने से पहले मंदिर में वाल्मीकि और जाटव समाज को छोड़कर सभी जातियों के लोग जाते थे लेकिन उसके आने के बाद लोगों ने आना जाना बंद कर दिया। अब ज़्यादातर ठाकुर और मौर्य जाति के लोग ही जाते हैं। मंदिर में जबसे तंत्र-मंत्र जैसी चीजें होने लगीं तो लोगों ने जाना कम कर दिया। पुलिस ने गुरुवार रात क़रीब 10 बजे पुजारी को दबोच लिया। पुजारी चार दिन से मेवली गांव में ही छुपा हुआ था।

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