नई दिल्ली. मौका मिलने पर देश में राजनीतिक वंशवाद पर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी समेत भाजपा के नेता हमला करने से नहीं चूकते। वंशवाद के सबसे बड़े प्रतीक के रूप में देश नेहरू गांधी परिवार के वारिसों के साथ चंद और नेताओं के नाम जानता है लेकिन उसे ये पता नहीं कि भारत की सभी राजनीतिक पार्टियों में वंशवादियों की भरमार है। इस बीमारी से भाजपा भी अछूती नहीं है।

वंशवाद की बात करें तो फिलवक्त मोदी सरकार में पीयूष गोयल, रविशंकर प्रसाद, धर्मेंद्र प्रधान और अनुराग ठाकुर सबसे बड़े वंशवादी के रूप में शामिल हैं। वे अपने परिवारों की राजनीतिक विरासत के चलते ही राजनीति में ये मुकाम बना पाए हैं। इसके अलावा हाल ही भाजपा में शामिल हुए ज्योतिरादित्य सिंधिया तीसरी पीढ़ी के वंशवादी हैं। इसके अलावा उनकी दो बुआ वसुंधरा और यशोधरा तथा वसुंधरा के बेटे दुष्यंत भी वंशवादियों की फेहरिस्त में शामिल हैं। यहां तक कि भाजपा अध्यक्ष जगत प्रकाश नड्डा भी वंशवाद के प्रतीक हैं क्योंकि उनकी सास जयश्री बनर्जी भाजपा टिकट पर सांसद रही हैं।

इसी तरह राजस्थान के राज्यपाल और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री रहे कल्याण सिंह के सांसद बेटे राजवीर और विधायक पोते संदीप का नाम भी वंशवादियों की सूची में शामिल है। वंशवादियों में कर्नाटक के मुख्यमंत्री बीएस येदियुरप्पा के कर्नाटक भाजपा उपाध्यक्ष बेटे बीवी विजयेंद्र और शिवमोगा से लोकसभा सदस्य दूसरे बेटे बीवाई राघवेंद्र भी राजनीतिक घराने से हैं।

इसके अलावा महाराष्ट्र विधानसभा में नेता विपक्ष एवं पूर्व मुख्यमंत्री देवेंद्र फड़णवीस, यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, अरुणाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री पेमा खांडू का नाम भी वंशवादियों में प्रमुखता से लिया जाता है। योगी आदित्यनाथ सांसद रह चुके महंत अवैद्यनाथ के उत्तराधिकारी हैं। राज्यसभा और राज्यसभा के कुल 396 भाजपा सदस्यों में से 47 नेताओं के वंशज हैं।

पश्चिम बंगाल में दलबदलू पूर्व मंत्री सुवेंदु अधिकारी व उनके भाई सौमेंदु अधिकारी भी वंशवाद के सहारे राजनीतिक मुकाम हासिल कर पाए हैं। इसके अलावा भाजपा के बंगाल चुनाव प्रभारी महासचिव कैलाश विजयवर्गीय के बेटे विधायक आकाश विजयवर्गीय, मध्यप्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री वीरेन्द्र सकलेचा के मंत्री बेटे ओमप्रकाश सकलेचा के साथ ही विश्वास सारंग के पिता कैलाश सारंग भी भाजपा के वरिष्ठ नेता हैं। विवेक ठाकुर, उदयनराजे भोसले, लैशेम्बा सानाजोअम्बा, नबाम राबिया, नीरज शेखर और संभाजी छत्रपति भी वंशवाद के प्रतीक हैं।

मेनका गांधी, वरुण गांधी, विजय गोयल, अनुप्रिया पटेल, राव इंद्रजीत, चौधरी वीरेंदर सिंह एवं उनका सांसद बेटा बृजेंद्र सिंह भी राजनीतिक खानदानों के वारिस हैं। इसके अलावा राजवीर सिंह, पूनम महाजन, प्रीतम मुंडे, रक्षा खड़से, सुजय विखे पाटिल, प्रवेश साहिब सिंह वर्मा, उत्तराखंड में हेमवती नंदन बहुगुणा के पोते सौरभ बहुगुणा और मंत्री यशपाल आर्य तथा उनके बेटे संजीव आर्य से लेकर, सौरभ बहुगुणा की बुआ और उत्तर प्रदेश में मंत्री रीता बहुगुणा जोशी भी वंशबेल के फल हैं।

राजनीतिक रिकार्ड के मुताबिक वंशवाद की सबसे बड़ी प्रतीक कांग्रेस के साथ ही ऐसा एक भी दल नहीं है, जिसके नेताओं ने अपने वारिसों को राजनीतिक कुर्सी नहीं दिलाई हो। यहां तक कि पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी के वंशज भी उनके उत्तराधिकारी के तौर पर राजनीतिक सत्ता का आनन्द लूट रहे हैं।

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