एक लाख से एक करोड के बॉण्ड खरीदने वालों में अव्वल

नई दिल्ली. चुनावी पारदर्शिता की समर्थक एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स (एडीआर) का विश्लेषण बताता है कि इलेक्टोरल बॉण्ड खरीदने वालों में देश के पांच शहर शीर्ष पर हैं। इन शहरों के नाम मुंबई, कोलकाता, नई दिल्ली, हैदराबाद और भुवनेश्वर है। पांचों शहर मूल्य के आधार पर बेचे गए बॉण्डों वाली श्रेणी में अगले पायदन पर हैं अर्थात एक हजार और दस हजार से अधिक कीमत वाले अधिकतर बॉण्ड इन्हीं शहरों ने खरीदे हैं।

विश्लेषण के मुताबिक मार्च 2018 से जनवरी 2020 के दौरान मूल्य के आधार पर बेचे गए बॉन्डों के टॉप खरीददार रहे मुंबई, कोलकाता, नई दिल्ली, हैदराबाद और भुवनेश्वर का बिहार चुनाव के दौरान खरीदे गए बॉन्डों में भी दबदबा रहा है।

इलेक्टोरल बॉन्ड की चौदहवीं किश्त में राजनीतिक चंदे के लिए खरीदे गए बॉन्ड्स का मूल्य 6,493 करोड़ रुपये आंका गया है। सरकार ने 2018 में इस वादे के साथ इलेक्टोरल बॉन्ड स्कीम शुरू की थी कि राजनीतिक चंदों की प्रक्रिया को पारदर्शी बनाया जा रहा है। इस मामले में 2018 में स्वयंसेवी संगठनों और एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स की इलेक्टोरल बॉन्ड को चुनौती देने वाली याचिका सुप्रीम कोर्ट में लटकी हुई है।

बिहार विधानसभा चुनाव 2020 से पहले अक्टूबर में 19-28 अक्टूबर तक कुल 282 करोड़ रुपये कीमत के इलेक्टोरल बॉन्ड बिके लेकिन मजे की बात ये कि बिहार में सिर्फ 80 लाख रुपये के इलेक्टोरल बॉन्ड बिक पाए। बिहार चुनाव के लिए राजनीतिक चंदे का करीब 68 फीसदी मुंबई और चेन्नई से आया जिन्होंने सबसे अधिक इलेक्टोरल बॉण्ड खरीदे।

एक्टीविस्टों का कहना है कि इससे साफ हो जाता है कि राजनीतिक चंदा कौन दे रहा है। हजार और 10 हजार रुपये वाले 99 फीसदी इलेक्टोरल बॉन्ड बिक नहीं पा रहे हैं। इसका खुलासा भी पहले हो चुका है। इलेक्टोरल बॉण्ड 1000 रुपये, 10,000 रुपये, 1 लाख रुपये, 10 लाख रुपये और 1 करोड़ रुपये तक हैं।

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