नई दिल्ली. केन्द्र सरकार जल्द ही बिटकाइन पर जीएसटी और आयकर लगा सकती है। आर्थिक खुफिया ब्यूरो और राजस्व खुफिया निदेशालय ने बिटकाइन करंसी पर जीएसटी लगाने का प्रस्ताव सरकार को भेजा है। बिटक्वाइन की रफ्तार का अंदाजा इतनी तेज है कि वर्तमान में एक बिटकाइन की कीमत 24 लाख रुपए पहुंच गई है। एक महीना पहले कीमत 14 लाख रुपए थी। 30 दिन में 10 लाख रुपए के उछाल से रिजर्व बैंक हतप्रभ रह गया है।

असल में इस करंसी का कोई नियंत्रक नहीं है और न ही इसकी खरीद-फरोख्त पर सरकार का नियंत्रण नहीं है। बिटकाइन पर सुप्रीम कोर्ट द्वारा रोक हटाए जाने के बाद अब टैक्स के जरिए मॉनीटरिंग का रास्ता निकाला गया है। केंद्रीय अप्रत्यक्ष कर बोर्ड (सीबीआईसी) बिटकाइन पर 18 या 28 फीसदी जीएसटी लगा सकता है।

इसकी ट्रेडिंग पर जीएसटी एक बार में नहीं बल्कि सभी ट्रांजेक्शन पर लगाया जा सकता है। इसके बाद बिटकाइन बेचने से हुए मुनाफे पर आयकर लगेगा। जानकारी के अनुसार खुफिया आर्थिक एजेंसियां इस संबंध में विस्तृत रिपोर्ट तैयार कर चुकी हैं। अनुमान है कि अकेले बिटक्वाइन से 10 हजार करोड़ रुपए का जीएसटी जनरेट हो सकता है।

चूंकि बिटक्वाइन का कोई रूप नहीं है इसलिए इसे अदृश्य या अमृत संपत्ति की श्रेणी में रखा जाएगा। इसे शेयर, प्रॉपर्टी या रियल इस्टेट की तरह निवेश के विकल्प के रूप में देखा जाएगा। क्रिप्टोकरंसी को कैश मनी की श्रेणी में रखा जाएगा, जिसका इस्तेमाल भी किया जा सकता है। ऐसा इसलिए किया जाएगा ताकि मुद्रा कानूनों के तहत इसकी सख्त मॉनीटरिंग की जा सके। फिलहाल इसकी ट्रेडिंग पर लगाम एक बड़ी चुनौती है और इसकी वजह से रुपया, डॉलर या पौंड जैसी मुद्राओं पर असर पड़ने का खतरा खड़ा हो गया है।

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