एक व्यवसायिक कोरोना परीक्षक का दावा

नई दिल्ली. कोरोना टीका लगाने की शुरूआत होने में दो दिन शेष हैं लेकिन एक ऐसी खबर आई है जिसे पढ़कर लगभग हर भारतीय खुश हो सकता है। व्यवसायिक रूप से बड़े पैमाने पर सीरालॉजिकल टेस्ट कर चुकी थायरोकेयर का दावा है कि प्रकृति अब तक 70 प्रतिशत भारतीयों का टीकाकरण कर चुकी है। एक विशाल आबादी संक्रमण से उबर चुकी है और प्राकृतिक रूप से लंबे समय चलने वाली प्रतिरक्षा क्षमता हासिल कर चुकी है। ये लोग टीका लगवाने वालों की तुलना में संभवतः लंबे समय तक कोरोना से बचे रहेंगे, क्योंकि अभी यह स्पष्ट नहीं है कि टीकाकरण से मिलने वाली प्रतिरक्षा कितने समय तक रहती है।

थायरोकेयर के इस निष्कर्ष के आधार पर चिकित्सा विशेषज्ञों का मानना है कि ज्यादातर भारतीयों में नेचुरल इम्युनिटी पनप चुकी है, इसलिए पूरी आबादी का टीकाकरण नुकसानदेह हो सकता है। कोरोना मृत्युदर के आंकड़े स्पष्ट कर रहे हैं कि कोविड संक्रमण बुजुर्ग आबादी के लिए सबसे बड़ा जोखिम है। दुनियाभर में 70 से कम उम्र के लोगों में संक्रमण के बाद ठीक होने होने की दर 99.95 प्रतिशत है। जबकि 70 वर्ष और उससे अधिक उम्र वालों के लिए यह आंकड़ा 95 प्रतिशत है। भारत में बुजुर्गों की आबादी 8.8 करोड़ है।

चिकित्सा विज्ञानियों का कहना है कि कोरोना संक्रमण से उबरने के बाद शरीर में उत्पन्न नेचुरल इम्युनिटी लंबे समय तक चलती है। संक्रमण के बाद विशिष्ट एंटीबॉडीज का उत्पादन, टी-सेल और बी-सेल जैसी प्रतिरक्षा प्रतिक्रियाएं होती हैं जो कि लगभग हर ठीक हो चुके मरीजों को पुनः संक्रमण से बचाती हैं। अब तक सामने आए 9 करोड़ संक्रमितों के बीच केवल 34 केस और दो मरीजों की मौत की घटनाएं ऐसी हैं जिन्हें पुनः संक्रमण ने दबोच लिया।

विशेषज्ञों का कहना है कि एक बार जोखिम वाले लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित हो जाए और अपेक्षाकृत कम संवेदनशील आबादी का टीकाकरण हो जाए तो आपदा प्रबंधन अधिनियम के तहत लॉकडाउन प्रतिबंधों को हमेशा के लिए और पूरी तरह हटा दिया जाना चाहिए।

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