गोहाटी हाईकोर्ट के फैसले से राज्य में प्रसन्नता की लहर

नई दिल्ली. नागा​लैंड में कुत्तों की फिर से शामत आने वाली है क्योंकि गोहाटी उच्च न्यायालय की कोहिमा पीठ ने उसके मांस की बिक्री पर लगी पाबंदी हटा ली है। नागा​ कुत्ते को अपना बेहतरीन दोस्त मानते हैं लेकिन उसे काटकर खाते समय उन्हें सिर्फ उसके मांस के लजीज व्यंजन याद रहते हैं। राज्य में कुत्ते का मांस सबसे ज्यादा लोकप्रिय है। इसी के चलते आवारा कुत्ते कहीं नजर नहीं आते। दूसरे राज्यों से तस्करी करके लाए गए कुत्ते नागालैंड में मुंहमांगी कीमतों पर बेचे जाते हैं।

मंत्रिमंडल ने लगाई थी पाबंदी

नागालैंड सरकार ने करीब चार महीने पहले राज्य में कुत्तों और उनके मांस की खरीद-फरोख्त पर पाबंदी लगा दी थी। लेकिन अब गोहाटी हाईकोर्ट की कोहिमा पीठ ने पाबंदी को हटा लिया है। कुत्तों के वाणिज्यिक आयात व व्यापार पर और कुत्ते के मांस की बिक्री पर पाबंदी लगाने का फैसला राज्य मंत्रिमंडल की बैठक में लिया गया। राज्य में कुत्ते के मांस की भारी मांग की वजह से असम और पश्चिम बंगाल से तस्करी के जरिए कुत्ते राज्य में लाए जाते हैं और ऊंची कीमतों पर बिकते हैं।

मांस बेचने वालों को मिलता है लाइसेंस

कुत्ते के मांस का कारोबार करने वालों को कोहिमा नगर निगम की ओर से बाकायदा लाइसेंस जारी किए जाते हैं। कारोबारियों ने सरकारी फैसले को चुनौती देते हुए गोहाटी हाईकोर्ट में एक याचिका दायर की थी। याचिका पर सुनवाई के बाद हाईकोर्ट ने नागालैंड सरकार से इस मामले में हलफनामा दाखिल करने को कहा था लेकिन सरकार ने हलफनामा दायर नहीं किया। कोर्ट के फैसले के बाद कुत्ते की बिक्री और उसके मांस की बिक्री फिर शुरू हो गई है। सरकारी पाबंदी से इस कारोबार से जुड़े हजारों लोगों की आजीविक ठप हो गई थी।

दवा समझकर खाते हैं कुत्ते का मांस

नागा समुदाय में कुत्ते को पालतू जानवर और इंसानों का सबसे अच्छा दोस्त माना जाता है लेकिन कुत्ते के मांस को बेहद अहम माना जाता है और दवा के तौर पर उसका इस्तेमाल किया जाता है। नागालैंड के कुछ समुदाय इसे प्रोटीन का जरिया मानते हैं। पाबंदी का विरोध करने वालों का तर्क था कि जब देश के दूसरे राज्यों में मुर्गे, बकरियों, गाय, भेड़ और भैंसों समेत कई जानवरों के मांस के सेवन पर कोई पाबंदी नहीं है तो यहां कुत्ते के मांस पर पाबंदी कैसे लगाई जा सकती है!

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