सेना प्रमुख ने छोटा बताया अध्ययन का सैंपल साइज

नई दिल्ली. देश की फौज के आधे से ज्यादा जवान तनावग्रस्त हैं। जबकि सेना ने इससे इनकार किया है। जवानों के तनावग्रस्त होने का दावा पिछले दिनों एक थिंक टैंक ने किया था।

रक्षा मंत्रालय के थिंक टैंक द यूनाइटेड सर्विस इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया (यूएसआई) ने एक शोध में दावा किया था कि 13 लाख जवानों वाली भारतीय फौज में आधे से अधिक गंभीर तनाव के शिकार हैं। भारतीय सेना हर साल दुश्मन या आतंकवादी हमलों की तुलना में आत्महत्या, भयावह घटनाओं और अप्रिय घटनाओं के कारण अधिक जवानों को खो रही है। दो दशक में भारतीय सेना में तनाव का स्तर बहुत ज्यादा बढ़ा है। साल 2010 से अब तक सेना के अलग-अलग पदों पर तैनात 1100 कर्मियों ने खुदकुशी की है। एक सेवारत कर्नल की ओर से किए गए इस अध्ययन को यूएसआई की वेबसाइट पर प्रकाशित किया गया था। हालांकि अब इसे वेबसाइट से हटा दिया गया हैं।

दो दिन पूर्व सेना प्रमुख मनोज मुकुंद नरवणे ने वार्षिक प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि जवानों में तनाव को लेकर यूएसआई की रिपोर्ट में सैंपल साइज काफी कम था। उन्होंने कहा, “99 प्रतिशत सटीकता के लिए कम से कम 19,000 सैंपल साइज होना चाहिए। हम जवानों में तनाव कम करने के लिए लगातार उपाय अपना रहे हैं। पिछले साल की तुलना में जवानों की आत्महत्या करने के मामलों में कमी आई है। यूएसआई की रिपोर्ट में कहा गया था कि बिना काम का तनाव भी बहुत ज्यादा है। रिपोर्ट में कहा गया था कि तनाव का असर सैनिकों के स्वास्थ्य के अलावा युद्ध क्षमता पर भी पड़ रहा है।

सेना प्रमुख ने बताया था कि हम चीन के साथ सीमा पर शांतिपूर्ण समाधान की उम्मीद कर रहे हैं, पर हम हर तरह की स्थिति से निपटने को तैयार हैं। भारतीय और चीनी सेना के बीच पूर्वी लद्दाख के मुद्दे पर अब तक आठ दौर की बातचीत हो चुकी है। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान और चीन मिलकर भारत के लिए एक शक्तिशाली खतरा पैदा करते हैं और टकराव की आशंका को दूर नहीं किया जा सकता है। पूर्वी लद्दाख में चीन ने अपने 10 हजार जवानों को पीछे हटाने की खबरों पर सेना प्रमुख ने कहा कि हर साल चीन के सैनिक ट्रेनिंग के लिए आगे आते हैं और बाद में चले जाते हैं। उन्होंने बताया कि विवाद वाली जगह से कोई भी पीछे नहीं हटा है और पूर्वी लद्दाख के हालात में कोई बदलाव नही आया है।

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