किसान आंदोलन का दूसरे माह में प्रवेश

नई दिल्ली. दो बार केन्द्रीय कृषि मंत्री रह चुके राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के चीफ शरद पवार ने किसान आंदोलन को विपक्ष प्रेरित बताने के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के आरोपों का जवाब दिया है। उन्होंने कहा कि ऐसा करके प्रधानमंत्री किसानों की बात को सुनने से इनकार कर रहे हैं। प्रधानमंत्री और गृहमंत्री अमित शाह को खेती-किसानी से अनभिज्ञ बताते हुए आंदोलनकारी किसानों से बातचीत के लिए कृषि की समझ रखने वाले नेताओं को आगे लाने के लिए कहा है।

पवार ने एक दिन पूर्व मीडिया से बातचीत में कहा कि कृषि संबंधी तीन कानूनों को थोप दिए जाने के बाद आंदोलन कर रहे किसानों को विपक्ष के बहकावे में आया हुआ बताकर मोदी सरकार उनकी बात को सुनने से इनकार कर ​रही है। उन्होंने कहा कि सत्ता पर काबिज पार्टी को ऐसे नेताओं को आगे करना चाहिए जिन्हें कृषि और किसानों के मुद्दों की गहराई से समझ हो।

पवार ने किसान आंदोलन के लिए विपक्ष को जिम्मेदार ठहराने की प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की कोशिशों को अनुचित करार देते हुए कहा कि अगर किसान सरकार की प्राथमिकता होते वे ये समस्या सुलझ जाती।

शरद पवार का कहना है कि वे मनमोहन सिंह सरकार के वक्त कृषि क्षेत्र में सुधार लागू करना चाहते थे लेकिन उनका स्वरूप वह नहीं होता जो भाजपा की सरकार ने देश की जनता पर जबरन थोपा है। उन्होंने कहा कि वे और मनमोहन सिंह कृषि क्षेत्र में कुछ सुधार लाना चाहते थे, लेकिन कुछ राज्यों के मंत्रियों को सुधार पर काफी आपत्तियां थी।

उनका कहना है कि कृषि से जुड़े मामलों से दिल्ली में बैठकर नहीं निपटा जा सकता है। राजनीति और लोकतंत्र में बातचीत होनी चाहिए। लोकतंत्र में कोई सरकार यह कैसे कह सकती है कि वह नहीं सुनेगी या अपना रूख नहीं बदलेगी।

पूरे देश में किसान परेशान है क्योंकि उन कानूनों से एमएसपी खरीद प्रणाली समाप्त हो जायेगी और सरकार को इन चिंताओं को दूर करने के लिये कुछ करना चाहिए। किसानों से बातचीत के लिये भाजपा के उन नेताओं को रखना चाहिए जिन्हें कृषि क्षेत्र के बारे में बेहतर समझ हो।

Leave a comment

Your email address will not be published.