नई दिल्ली. आखिरकार मोदी सरकार ने उस गलती को सुधार लिया है जिसके चलते लद्दाख में चीनी सेना की घुसपैठ का समय पर माकूल जवाब नहीं दिया जा सका और भारत के 20 जवानों और अधिकारियों को सर्वोच्च बलिदान देना पड़ा। सरकार ने उस माउंटेन कोर के गठन प्रस्ताव को फिर से हरी झंडी दे दी है जिसे 2016 में चीनी सीमा पर तैनात हो जाना था।

सैन्य मामलों के जानकारों के अनुसार अगर सरकार सत्ता में आते ही कोर गठन के प्रस्ताव को ठंडे बस्ते में नहीं डालती तो चीनी सेनाओं को तेजी के साथ भारतीय सीमा में आ घुसने का मौका नहीं मिलता। हालांकि सेना ने जान की बाजी लगाकर कैलाश रेंज की पहाड़ियों पर कब्जा करके चीनी मंसूबों को नाकाम कर दिया था।

सरकार ने मैकेनाइज़्ड फोर्सेज पर आधारित तीन स्ट्राइक कोर में से एक को माउंटेन स्ट्राइक कोर के रूप में पुनर्गठित करने का फैसला किया है। इसे 17 माउंटेन स्ट्राइक कोर नाम दिया जाएगा और ये केवल चीनी सीमा की सुरक्षा के लिए उत्तरदायी होगी।

भारतीय थलसेना में 17 माउंटेन डिवीजन और 18 इन्फैन्ट्री डिवीजन हैं। कुछ स्वतंत्र इन्फैन्ट्री ब्रिगेड भी देश के अलग-अलग हिस्सों में तैनात हैं। अब इन डिवीजनों को इंटीग्रेटेड बैटल ग्रुप्स के रूप में पुनर्गठित किया जाएगा। सेना के ढांचे में एक इन्फैन्ट्री बटालियन 120 सैनिकों की चार राइफल कंपनियों में विभक्त होती हैं। बटालियन में गोलों और टैंक-रोधी गाइडेड मिसाइल के लिए विशेष प्लाटून तथा अन्य सपोर्ट के लिए उप यूनिट होती है। फिलवक्त थलसेना में 390 इन्फैन्ट्री बटालियन, 9 पैरा स्पेशल फोर्सेस बटालियन, 5 पैरा बटालियन, 63 राष्ट्रीय राइफल्स बटालियन, 40 असम राइफल बटालियन हैं। अब इनमें से अधिकांश बटालियन को तीन राइफल कम्पनी आधारित बटालियन बनाने पर विचार हो रहा है।

सैन्य विशेषज्ञों का मानना है कि सेना की आर्मर्ड रेजिमेंट में टैंकों की संख्या घटाकर 31 करने की जरूरत। अभी एक रेजिमेंट में 44 टैंक होते हैं। सेना के पास करीब करीब 70 बख्तरबंद रेजिमेंट हैं। अगर इन्हें 31 टैंकों के आधार पर पुनर्गठित करने को मंजूरी मिली तो 980 टैंक अतिरक्त हो जाएंगे। इन सरपल्स टैंकों से 31 टैंकों वाली 32 बख्तरबंद रेजिमेंट और बनाई जा सकेंगी। जहां तक मेकेनाइज्ड इन्फैन्ट्री बटालियनों का सवाल है तो इनहें धीरे-धीरे सरल, सस्ते पहियों वाले बख्तरबंद वाहनों से से लैस करने पर भी विचार किया जा रहा है।

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