सुनील शर्मा

जयपुर. भारत में सर्दी के मौसम में खाया जाने वाला अनाज है बाजरा। सर्दी के मौसम में इसकी रोटी सुबह व शाम को या खिचड़ी जरुर खानी चाहिए। बाजरा गर्मी के साथ साथ हमारी हड्डियों को मजबूती प्रदान करता है। ग्रामीण इलाकों में आज भी बाजरे से बनी रोटी और चूरमा ठंड में बहुत पसंद किया जाता है।

बाजरे में मैग्नीशियम, कैल्शियम, मैग्नीज, ट्रिप्टोफेन, फास्फोरस, फाइबर(रेशा), विटामिन-बी, एण्टीऑक्सीडेण्ट आदि भरपूर मात्रा मे पाये जाते हैं। बाजरा खाने से एनर्जी मिलती है। ये ऊर्जा का एक बहुत अच्छा स्रोत है। अगर वजन घटाना चाहते हैं तो बाजरा खाना फायदेमंद होगा।

नियंत्रित करता है ब्लड प्रेशर

बाजरा कोलेस्ट्रॉल लेवल को कंट्रोल करने में मदद करता है, जिससे दिल से जुड़ी बीमारियों के होने का खतरा कम हो जाता है। ये मैग्नीशियम और पोटैशियम का भी अच्छा स्रोत है जो ब्लड प्रेशर को नियंत्रित रखने में मददगार है। बाजरे में भरपूर मात्रा में फाइबर्स पाए जाते हैं जो पाचन क्रिया को दुरुस्त रखने में सहायक हैं। बाजरा खाने से कब्ज की समस्या नहीं होती है।

नहीं होता एनीमिया

कई अध्ययनों में कहा गया है कि बाजरा कैंसर से बचाव में सहायक है। ये न केवल कैंसर से बचाव में सहायक है बल्कि इसके नियमित सेवन से डायबिटीज का खतरा भी कम हो जाता है। डायबिटीज के मरीजों को इसके नियमित सेवन की सलाह दी जाती है। बाजरे की रोटी खाने वालों को हड्डियों में कैल्शियम की कमी से पैदा होने वाले रोग आस्टियोपोरोसिस और खून की कमी यानी एनीमिया नहीं होता है। बाजरे में भरपूर कैल्शियम होता है जो कि हड्डियों के लिए रामबाण औषधि है।

आयरन से भरपूर

आयरन भी बाजरे में इतना अधिक होता है कि खून की कमी से होने वाले रोग नहीं हो सकते। गर्भवती महिलाओं को कैल्शियम और आयरन की जगह बाजरे की रोटी और खिचड़ी दी जाये तो इससे उनके बच्चों को जन्म से लेकर पाँच साल की उम्र तक कैल्शियम और आयरन की कमी से होने वाले रोग नहीं होते। इतना ही नहीं बाजरे का सेवन करने वाली महिलाओं में प्रसव में असामान्य पीड़ा के मामले भी न के बराबर पाए गए। गर्भवती महिलाओं को कैल्शियम की गोलियाँ खाने की जगह रोज बाजरे की दो रोटी खानी चाहिए। बाजरे की रोटी का स्वाद जितना अच्छा होता है, उससे अधिक उसमें गुण भी होते हैं।

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