फेक न्यूज के बाद सामने आई लेजर हथियार की जानकारी

नई दिल्ली. हालांकि भारत की सेना ने एलएसी पर माइक्रोवेव हथियारों से हमले की खबरों को फेक न्यूज करार दिया लेकिन इसने प्रत्येक भारतीय को चिंता में डाल दिया है। आखिर क्या होते हैं माइक्रोवेव हथियार और वे कैसे काम करते हैं! यह जानने की उत्सुकता हर किसी के मन में है।

एक मीटर तक की होती है वेबलैंथ

माइक्रोवेव वेपन्स डायरेक्टेड एनर्जी वेपन (डीईडब्ल्यू) का एक प्रकार होते हैं। माइक्रोवेव्स इलेक्ट्रोमैग्नेटिक रेडिएशन की वेबलैंथ एक मिमी से लेकर एक मीटर जितनी होती है। इनकी फ्रीक्वेंसी 300 मेगाहर्ट्ज (100 सेंटीमीटर) और 300 गीगाहर्ट्ज (0.1 सेंटीमीटर) के बीच होती है। इन्हें हाई-एनर्जी रेडियो फ्रीक्वेंसी भी कहा जाता है। जिस तरह घरों में माइक्रोवेव काम करता है। उसी तरह से ये वेपन भी काम करता है। इसमें एक मैग्नेट्रॉन होता है जो माइक्रोवेव तरंगें भेजता है। ये तरंगें जब किसी खाद्य पदार्थ से होकर गुजरती हैं तो वो गर्मी पैदा करती हैं। ये हथियार भी इसी सिद्धांत पर काम करते हैं।

19 सदी के आखिर में हुई थी खोज

इसे नॉन-कॉन्टैक्ट वॉरफेयर कहते हैं जिसमें आर्टिलरी शेल, बुलेट्स, टैंक के राउंड की अपेक्षा अल्ट्रावॉयलेट रेज यूज होती है। भारत का डीआरडीओ भी इन हथियारों पर काम कर रहा है। 19वीं सदी के आखिर में डीईडब्ल्यू खोज की शुरुआत हुई थी। 1930 में रेडार की खोज के साथ इस दिशा में महत्वपूर्ण बढ़त हासिल हुई। हथियारों से सम्बंधित एक किताब हाई पावर माइक्रोवेव्सः स्ट्रैटेजिक एंड ऑपरेशनल इंप्लीकेशंस फॉर वॉरफेयर में इसकी विस्तृत जानकारी दी गई है।

टारगेट को फोकस एनर्जी के साथ करते हैं नष्ट

डायरेक्टेड एनर्जी वेपन ऐसे हथियार होते हैं जो बेहद फोकस्ड एनर्जी के साथ टारगेट को नष्ट कर देते हैं। फोकस्ड एनर्जी में लेजर, माइक्रोवेव औऱ पार्टिकल बीम शामिल हैं। ये सैनिकों, मिसाइलों और ऑप्टिकल डिवाइसेज को निशाना बनाते हैं। ये बेआवाज होते हैं। वैज्ञानिकों के अनुसार प्रकाश पर गुरुत्वाकर्षण का बेहद कम असर होता है लेजर या माइक्रोवेव आधारित हाई-पावर डीईडब्ल्यू दुश्मन के ड्रोन्स या मिसाइलों को बेकार कर देते हैं।

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