मंत्री समूह की सिफारिश है कि घटा दी जाए इंटर्नशिप की अवधि

नई दिल्ली. चिकित्सा शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि एमबीबीएस कोर्स की साढ़े पांच साल की अवधि को साढ़े चार साल कर दिए जाने की मंत्री समूह की सिफारिश को माना गया तो देश में मेडिकल शिक्षा तबाही के रास्ते पर आगे बढ़ जाएगी। केन्द्र सरकार की ओर से गठि​त एक मंत्री समूह की सिफारिश है कि साढ़े पांच साल के एमबीबीएस कोर्स को एक साल कम कर दिया जाए। इस सिफारिश पर मेडिकल एक्सपर्ट और शिक्षकों का कहना है कि कोर्स को अब और छोटा नहीं किया जा सकता।

देश में अभी एमबीबीएस डिग्री पूरी करने के लिए साढ़े चार साल की पढ़ाई और एक साल की इंटर्नशिप करनी पड़ती है। आयुष मंत्री श्रीपद येसो नायक की अध्यक्षता में स्वास्थ्य पर बने मंत्री समूह ने सुझाव दिया है कि कोर्स को घटाकर साढ़े चार साल कर दिया जाए और इसमें छह महीने की इंटर्नशिप अवधि शामिल हो। ये सिफारिशें अक्टूबर में सरकार को पेश की गई थी। सिफारिशों में कहा गया है कि कोर्स की अवधि कम करने के अलावा सभी डॉक्टरों के लिए ग्रामीण इलाक़ों में दो साल की सेवा अनिवार्य कर दी जाए।

जबकि चिकित्सा शिक्षा विशेषज्ञों के अनुसार कोर्स पहले ही बहुत छोटा है। भावी डाक्टरों को बहुत से कौशल सीखने होते हैं। इंसानी जीवन के मामले में क्वॉलिटी से समझौता नहीं होना चाहिए। एमबीबीएस बस एक बेसिक मेडिकल डिग्री है और इसे छोटा करना कोई अच्छा विचार नहीं है। एमबीबीएस के लिए 4.5 साल और एक साल इंटर्नशिप सही है। विशेषज्ञों के अनुसार मेडिकल छात्रों में तनाव का स्तर बहुत ऊंचा होता है। कोर्स की अवधि घटाने से छात्रों पर सीखने का दबाव बढ़ जाएगा।

एक अन्य विशेषज्ञ का कहना है कि इंटर्नशिप के इन 12 महीनों मेंछात्रों को अलग-अलग विभागों में भेजा जाता है। इंटर्नशिप को घटाकर छह महीना करने का मतलब है कि भावी डाक्टर को कुछ विभागों का प्रेक्टिकल अनुभव नहीं कराया जाए। जहां तक डाक्टरों की ग्रामीण इलाकों में तैनाती का सवाल है तो ये एक अच्छा कदम है क्योंकि देहात में डाक्टर मर्जी से जाना पसंद नहीं करते हैं।

वैसे भी देश में डॉक्टर-मरीज़ अनुपात में भारी अंतर है। अगर ग्रामीण आबादी को डाक्टर मिल जाएं तो मेडिकल कॉलेजों से जुड़े अस्पतालों पर मरीजों का दवाब कम हो जाएगा। मौजूदा सिस्टम के मुताबिक, सरकारी कॉलेजों के पोस्ट ग्रेजुएट कोर्स में दाखिला लेने के समय छात्रों को एक बांड भरना होता है कि कोर्स पूरा होने के बाद वे सरकारी अस्पतालों और स्वास्थ्य केंद्रों में सेवाएं देंगे।

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