ब्रेन के केमिकल डिस्टर्बेंस का दूसरा नाम है अवसाद

नई दिल्ली. संसार में 30 करोड़ लोग डिप्रेशन से जूझ रहे हैं। आने वाले समय में ये तादाद और बढ़ने की आशंका है। डिप्रेशन से उबरा जा सकता है, लेकिन उसके लिए इसकी पहचान जरूरी है। डिप्रेशन विशेषज्ञों के अनुसार आयुर्वेद में डिप्रेशन का कारगर इलाज मौजूद है। आयुर्वेद में डिप्रेशन को चित्तोदवेग या मनोअवसाद के रूप में जानते हैं।

आयुर्वेद का कहना, मोह से दूर रहना

अवसाद एक मानसिक रोग है, जो मन में तमोगुण और रजोगुण की अधिकता से होता है। जब हमारा मन तमोगुण और रजोगुण से भर जाता है तो मन में नकारात्मक विचार आने लगते हैं और मन दुःखी होता है। जब किसी का मन कमजोर हो अर्थात उसमें सत्व गुण कम हो तो मन को धक्का लगना आसान हो जाता है। तमोगुण और रजोगुण की गड़बड़ी के कई कारण होते हैं जो कि शारीरिक समस्याओं से जुड़े हो सकते हैं, भावनात्मक हो सकते हैं या व्यावहारिक हो सकते हैं।आयुर्वेद में चित्त विच्छेद या अवसाद जैसे मानसिक रोगों का मूल कारण मोह माना गया है।

कुपोषित मस्तिष्क पर आसानी से होता है डिप्रेशन का हमला

मस्तिष्क में वात, पित्त, कफ का असंतुलन और मानसिक कुपोषण अर्थात जब मस्तिष्क को पोषण ठीक से नहीं मिलता तो अवसाद हो जाता है। डिप्रेशन एक ऐसा मानसिक विकार है, जो आम तौर पर जीवन में घटित किसी अनचाही दुर्घटना से शुरू हो सकता है। हीन भावना, सही ढंग से नींद पूरी नहीं हो पाना, अनियमित खानपान, डायबिटीज, कैंसर, थायराइड इत्यादि से भी ये जन्म ले सकता है।

मजबूत मन से दूर रहता है डिप्रेशन

जब मन मजबूत होता है तो भावानात्मक समस्याएं, घर या काम का तनाव, पारिवारिक कलह, वित्तीय दिक्कतों, रिलेशन में प्रॉब्लम, किसी को खोने का गम जैसी चीजों को झेल जाता है, लेकिन जब किसी का मन कमजोर हो यानी उसमें सत्व गुण कम हो तो मन को धक्का लगना आसान हो जाता है। आयुर्वेद में एक व्यवस्थित तरीके से डिप्रेशन का उपचार होता है, भोजन से लेकर विचार, व्यवहार जैसे हर पहलू पर ध्यान दिया जाता है। डिप्रेशन के इलाज में मरीजों को मानसिक रूप से संतुष्ट करना जरूरी होता है।

एक्ससाइज है रामबाण औषधि

डिप्रेशन के मरीजों में विश्वास पैदा करना होता है कि वे ठीक हो सकते हैं। डिप्रेशन में इंसान अनुशासन से निकल जाता है, उसकी कुछ इच्छा ही नहीं होती है, ना वो किसी से बात करना चाहता है, ना किसी से मिलना या बाहर निकलना चाहता है, खाने-पीने से लेकर सोने तक का कोई तय वक्त नहीं होता। रोगी की लाइफस्टाइल को नियमित करना जरूरी होता है। डिप्रेशन से निपटने में एक्सरसाइज और प्राणायाम का बहुत बड़ा रोल है। एक्सरसाइज से फील गुड हार्मोन बढ़ते हैं तो प्राणायाम से पूरे शरीर में सकारात्मकता आती है।

शारीरिक लेवल पर ब्रेन के केमिकल डिस्टर्ब को थामने के लिए ब्राह्मी, आंवला, अश्वगंधा अच्छा काम करती है, इसका चूर्ण बना कर दिया जाता है। मेध्य रसायन (मण्डूकपर्णी, ब्राह्मी, यष्टिमधु, अश्वगंधा) का प्रयोग भी कारगर माना गया है। शंखपुष्पी, ब्राह्मी, मद्येष्टी, वच, गिलोय जैसी औषधियों का प्रयोग मस्तिष्क में अंसतुलन और कुपोषण से निपटने में सहायता करता है।

सिर की मालिश भी देती है फायदा

अवसाद में सिर की मालिश और शरीर की मालिश से भी फायदा होता है। मालिश से केमिकल असंतुलन ठीक होता है। आजकल लोगों का जीवन एकरस हो गया है। इसीलिए आयुर्वेद कहता है कि व्यक्ति को आध्यात्मिक होना चाहिए और स्वअध्ययन करना चाहिए। ध्यान, योग, प्राणायाम करें। सकारात्मक और मनोबल बढ़ाने वाली पुस्तकें पढ़ें जिससे प्रेरणा मिलती हो। मन को प्रसन्न करने वाला संगीत सुनें। पसंदीदा चीजें खाएं। जहां घूमने-फिरने का मन हो वहां जाएं।

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