चिकित्सा के अखाड़े में कोरोना को धोबी पछाड

नई दिल्ली. चिकित्सा विज्ञानियों ने एक अध्ययन में दावा किया है कि कोरोना पीडित उन रोगियों के फेफडों के ऊतक ठीक हो गए। एक विदेशी विश्वविद्यालय के शोधकर्ताओं का कहना है कि अस्पतालों के गहन चिकित्सा कक्ष (आईसीयू) में भर्ती रोगी ज्यादा अच्छे तरीके से ठीक हुए।

मीडिया में आई खबरों के मुताबिक ‘क्लीनिकल इन्फेक्शियस डिजीजेज़’ पत्रिका में प्रकाशित अध्ययन में बुरी तरह संक्रमित होकर भी ठीक हो चुके 124 रोगियों को शामिल किया गया।

रोगियों की सीटी स्कैन से जांच के साथ ही फेफड़ों की भी जांच की गई। तीन महीने बाद शोधकर्ताओं ने पाया कि फेफड़ों के ऊतक अच्छी तरह से ठीक हो चुके हैं। फेफड़े के ऊतक में क्षति सामान्य तौर पर सीमित थी और उन रोगियों में ज्यादा थी जिनका इलाज आईसीयू में हुआ। तीन महीने के बाद सबसे सामान्य शिकायत थकान, सांस फूलना और सीने में दर्द की थी।

निमोनिया या एक्यूट रेस्पिरेटरी डिस्ट्रेस सिंड्रोम (एआरडीएस) से ठीक हुए मरीजों की भांति लक्षण इन रोगियों में भी दिखे, जिनमें फेफड़ों में तरल पदार्थ जम जाता है। रोगियों को तीन श्रेणियों में विभक्त किया गया। आईसीयू में भर्ती समूह के अलावा दूसरा समूह अस्पताल के नर्सिंग वार्ड में भर्ती था और तीसरे समूह में लाक्षणिक रोगी थे लेकिन वे घर पर ही रहे। अध्ययन में आकलन किया गया कि तीन महीने के बाद रोगियों पर क्या प्रभाव रहा।

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