नकली स्पाइक प्रोटीन से मजबूत करेगा इम्यून सिस्टम

नई दिल्ली. भारत में जिन दो वैक्सीन को आपात इस्तेमाल की मंजूरी दी गई है, वे चिम्पाजी में पाए जाने वाले कॉमन कोल्ड वायरस या एडिनोवायरस के कमज़ोर किए गए रूप से बनाई गई हैं।

इस वायरल वेक्टर को सार्स-सीओवी-2 स्पाइक प्रोटीन का जेनेटिक मैटेरियल से बनाया गया है। इसका स्पाइक प्रोटीन वायरस की ऊपरी सतह पर मौजूद प्रोटीन जैसा है।

ये प्रोटीन ही कोरोना वायरस को ताकत प्रदान करता है और इंसानी सेल से जाकर चिपक जाता है। दूसरे शब्दों में कहें तो ऑक्सफोर्ड-एस्त्राज़ेनेका नकली स्पाइक प्रोटीन पैदा करके प्रतिरक्षात्मक प्रतिक्रिया के जरिए इम्यून सिस्टम तैयार करता है।

इस वैक्सीन के एक महीने के अंतराल में दो डोज कोरोना से सुरक्षा प्रदान करेंगे। फाइज़र और मॉडर्ना वैक्सीन मैसेंजर आरएनए या एमआरएनए प्लेटफॉर्म इस्तेमाल करती हैं। एस्त्राज़ेनेका 50 साल पुराने प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल करके विकसित किया गया है। ये चिम्पाजी में पाए जाने वाले एडिनोवायरस पर आधारित है। कोविशील्ड वैक्सीन ऑक्सफोर्ड-एस्ट्राजेनेका वैक्सीन का भारतीय संस्करण है।

ऑक्सफोर्ड-एस्त्राज़ेनेका को 2 डिग्री से 8 डिग्री सेल्सियस तापमान के बीच ढोया जा सकता है। ये वैक्सीन छह महीने तक स्टोर की जा सकती है। जबकि फाइज़र-बायोएनटेक वैक्सीन को रखने और लाने ले जाने के लिए माइनस 70 से लेकर माइनस 20 डिग्री सेल्सियस तक तापमान की ज़रूरत होती है। सबसे महत्वपूर्ण ये कि कोविशील्ड की कीमत 225 से 300 रुपए के बीच होगी जबकि फाइज़र वैक्सीन की कीमत करीब 37 डॉलर है। ये मूल्य भारतीय मुद्रा में 2,700 रुपए होता है।

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