नई दिल्ली. भोपाल में कोरोना वायरस का टीका ‘कोवैक्सीन’ लगाए जाने के बाद 45 वर्षीय एक व्यक्ति की मौत के बाद कोवैक्सीन फिर से संदेह के घेरे में आ गई है। इससे पहले उसे सीरम इंस्टीट्यूट के अदार पूनावाला पानी बता चुके हैं। भारत बायोटेक और भारतीय आयुर्विज्ञान परिषद की बनाई हुई स्वदेशी कोरोना वैक्सीन कोवैक्सीन का फाइनल ट्रायल सात जनवरी को पूरा हुआ है।

घर में मृत पाए गए दीपक 
भोपाल के पीपुल्स मेडिकल कॉलेज में टीका लगवाने वाले दीपक मरावी की मौत 21 दिसंबर 2020 को हो गई थी, लेकिन इसकी जानकारी आठ जनवरी सार्वजनिक हुई। मध्यप्रदेश के एक अखबार के अनुसार दीपक भोपाल के टीला जमालपुरा स्थित सूबेदार कॉलोनी में अपने घर में मृत पाए गए थे। अगले दिन उनके शव का पोस्टमॉर्टम हुआ था और प्रारंभिक रिपोर्ट में उनके शरीर में जहर मिलने की पुष्टि हुई है।

आठ जनवरी को दीपक के 18 वर्षीय बेटे आकाश मरावी ने उनकी मौत की जानकारी दी। हालांकि मौत कोवैक्सीन का टीका लगवाने से हुई या किसी अन्य कारण से, इसकी पुष्टि पोस्टमार्टम की फाइनल रिपोर्ट आने के बाद होगी। दीपक के शव का विसरा पुलिस को सौंप दिया गया है।

12 दिसंबर को दी गई थी पहली खुराक 

दीपक मरावी कोवैक्सिन के तीसरे चरण के मानव परीक्षण में शामिल हुए थे। पीपुल्स मेडिकल कॉलेज के डीन डॉ. अनिल दीक्षित ने कहा कि यह मामला संज्ञान में आया था कि एक स्वयंसेवक दीपक मरावी की मृत्यु हो गई। मरावी के बेटे आकाश ने बताया कि वह मजदूर थे और टीका परीक्षण के लिए एक स्वयंसेवक के रूप में शामिल हुए थे। उन्हें 12 दिसंबर को पहली खुराक दी गई थी।

दीपक की पत्नी वैजयंती मरावी के अनुसार वो इंजेक्शन लगवा कर आए। सात दिन तक ठीक थे। खाना खा रहे थे। इसके बाद उन्हें चक्कर आने लगे। मैंने उनसे कहा था कि चलते नहीं बन रहा तो आराम करो। वो खाना थोड़ा-थोड़ा खा रहे थे। 21 को उन्हें उल्टी होने लगी मुंह से झाग निकल रहा था। मैंने कहा डॉक्टर के पास चलो, लेकिन वे गए नहीं। उन्हें कोई बीमारी नहीं थी। उनकी मौत वैक्सीन से हुई है। हमें कहीं से कोई मदद नहीं मिली, कोई नहीं आया. मैंने उनसे कहा था कि वैक्सीन मत लगवाना ये खतरे का काम है। अब हमारे पास कुछ नहीं बचा।

दीपक के बेटे आकाश के अनुसार टीका लगवाने के बाद उनकी सेहत का हाल जानने के लिए अस्पताल से फोन आते रहे। 21 दिसंबर को उनके पिता की निधन की जानकारी लेने पीपुल्स प्रबंधन से तीन बार फोन आया, लेकिन संस्थान से कोई भी नहीं आया। उन्होंने बताया के उनके पिता भोपाल गैस त्रासदी के पीड़ित भी थे।

रिपोर्ट के अनुसार, पीपुल्स मेडिकल कॉलेज की थर्ड फेज क्लीनिकल ट्रायल टीम ने छह जनवरी की दोपहर को दीपक के मोबाइल पर वैक्सीन की दूसरे डोज के लिए फोन किया था। यह कॉल आकाश ने रिसीव किया। उन्होंने टीम को पिता के निधन की फिर से सूचना दी। इसके बाद एग्जीक्यूटिव ने कॉल डिसकनेक्ट कर दिया।

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