नई दिल्ली. इंसानों का नहीं बल्कि सांपों का काल है किंग कोबरा। जी हां, सांपों पर रिसर्च करने वालों का दावा है कि भारतीय नस्ल का किंग कोबरा चूहे, गिलहरी, चिडिया इत्यादि नहीं बल्कि सांपों को खाता है। फिर भले वह जहरीला करैत हो अथवा बिना जहर वाला सांप। भूख लगने पर किंग कोबरा उन्हीं को चाव से खाता है।

किंग कोबरा भारतीय नस्ल का नेशनल रेप्टाइल है और दुनिया के सबसे बड़े जहरीले सांपों में उसकी गिनती होती है। किंग कोबरा देश के कई हिस्सों में पाया जाता है। जिनमें भारत के पूर्वी और पश्चिमी घाट, उत्तर-पूर्वी राज्य, सुंदरबन और अंडमान के कुछ खास इलाके शामिल हैं। पहाड़ी राज्य उत्तराखंड के कुछ जिलों में भी किंग कोबरा की मौजूदगी दर्ज की गई है। उत्तराखंड वन विभाग की एक रिपोर्ट के अनुसार नैनीताल जिला किंग कोबरा का गढ़ है। उत्तराखंड के पांच जिलों में किंग कोबरा दिखता रहा है। एक खास अंतराल में नैनीताल में 83 बार दिखा किंग कोबरा देहरादून में भी 32 बार देखा गया। पौड़ी, उत्तरकाशी, हरिद्वार में भी उसे यदा-कदा देखा गया है।

ठंडे खून वाला कोबरा खुद बनाता है अपना घोंसला

किंग कोबरा ठंडे खून वाला प्राणी है। वह एकमात्र ऐसा सर्प है जिसकी मादा अंडे देने के लिए घोंसला बनाती है। 2006 में नैनीताल जिले की भवाली फॉरेस्ट रेंज में इसका घोंसला पहली बार देखा गया। साल 2012 में मुक्तेश्वर में भी इसका घोंसला दिखा।

शान के खिलाफ है चूहे खाना

भोजन श्रंखला में किंग कोबरा एपेक्स प्रीडेटर यानी सबसे ऊपर है। जहां अन्य सांप चूहों को खाकर उनकी संख्या नियंत्रित करते हैं, वहीं किंग कोबरा सांप खाकर सांपों की संख्या को नियंत्रित करता है। यह धरती पर सांपों की संख्या नियंत्रित करने वाला प्राणी है। वन्यजीव संरक्षण कानून के तहत संरक्षित श्रेणी वाले किंग कोबरा की कई खासियत इसे बाकी सर्पों से अलग करती हैं।

18 फुट तक का होता है किंग

आकार के हिसाब से 18 फुट लम्बाई तक का ये विषैला सांप अकेली ऐसी प्रजाति है जिसमें मादा अंडे देने से पहले अपना घोंसला बनाती है। अंडों से बच्चे निकलने में 80 से 100 दिन लगते हैं। 2 महीने तक भूखी रहकर अंडों की देखभाल करने वाली मादा बच्चे निकलने से ठीक पहले वह जगह छोड़कर चली जाती है।

शांति​​प्रिय है किंग कोबरा

किंग कोबरा शांतिप्रिय सांप है। भारत में सांपों की कई जहरीली प्रजातियां हैं लेकिन चार ही सांप हैं, जिनके काटने से अधिकांश मौतें होती हैं। ये हैं रसेल्स वाइपर, सॉ स्केल वाइपर, क्रेट और इंडियन कोबरा। किंग कोबरा जंगल में ही रहना पसंद करता है। नैनीताल जिले में किंग कोबरा अपना घोंसला चीड़ की नुकीली पत्तियों से बनाता है।

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