नई दिल्ली. देश के डायबिटीज रोगियों के लिए बहुत बड़ी खुशखबरी, अब वे खुलकर वाइन पी सकेंगे। इससे उन्हें न सिर्फ दिमाग को सकारात्मक रखने में मदद मिलेगी बल्कि ये वाइन मधुमेह को भी नियंत्रण में रखेगी।

जामुन के फल और गुठली को मधुमेह रोगियों के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है। मधुमेह रोगियों की बढ़ती संख्या के साथ इस फल की मांग भी बढ़ रही है। जामुन बाजार में सीमित समय तक ही उपलब्ध रहता है परन्तु इसके फलों से बनी वाइन, जूस, बार, सिरका, जैली ताजे फल के समान ही पौष्टिक, स्वादिष्ट और स्वास्थ्यवर्धक होते हैं। जामुन को सुपर फ्रूट के रूप में भी जाना जाता है। पेट दर्द और मूत्र रोग में राहत देने वाला यह फल एंटी-ऑक्सीडेंट का खजाना है। बायोएक्टिव यौगिक कैंसर, हृदय रोग, मधुमेंह, अस्थमा और गठिया में प्रभावी जामुन की वाइन बेहद प्रभावी पाई गई है।

जामुन के मूल्य संवर्धित प्रोडक्ट्स में वाइन औषधीय गुणों के अतिरिक्त स्वाद एवं सुगंध में बेहतरीन है। जामुन के फलों में पाई जाने वाली शर्करा इसे वाइन बनाने के लिए उपयुक्त बनाती है। जामुन मधुमेह रोधी गुणों के लिए मशहूर है। इसमें जाम्बोलिन नामक ग्लाइकोसाइड की उपस्थिति अग्न्याशय से इंसुलिन स्राव में सुधार करता है। रक्त में शर्करा अधिक होने पर जामुन का घटक एल्कॉजिक एसिड स्टार्च के शर्करा में रूपांतरण को नियंत्रित करने में सहायक है।

जामुन की वाइन बनाने वाली कंपनियां पल्प (गूदे) उत्पादन के लिए जामवंत किस्म का उपयोग करती हैं। इस किस्म में 90 प्रतिशत से अधिक गूदा पाया जाता है। फलों से मदिरा पुरातनकाल से तैयार की जा रही है और शर्करा युक्त जामुन के फलों से रेड वाइन बनाई जाती है। वाइन बनाने के लिए जामुन उपयुक्त है। इसमें स्वाद, शर्करा और टैनिन का अच्छा संतुलन है। जामुन वाइन कई प्रसिद्ध जैव सक्रिय यौगिकों से भी समृद्ध है। जामुन को विभिन्न स्वादों, सुगंध और रंग के साथ विभिन्न प्रकार की वाइन में परिवर्तित किया जा सकता है। अभी जामुन वाइन उद्योग शैशवावस्था में है। देश के विभिन्न क्षेत्रों में जामुन के पेड़ बहुतायत में मिलते हैं।

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