नई दिल्ली. थाईलैंड की इंद्रिरा और ताइवानी फिजा ने सब्जियों के राजा आलू के एक गढ़ को ध्वस्त कर दिया है। इंद्रिरा और फिजा उस शिमला मिर्च की किस्म हैं जिसे अभी तक भारत में उगाया नहीं जा रहा था लेकिन अब ये दोनों किस्में देसी शिमला मिर्च की आशा और भारत नामक किस्म को कड़ी टक्कर दे रही हैं।

ये सम्भव हो पाया है, फर्रुखाबाद में उमर्दा में बने सेंटर ऑफ एक्सीलेंस फॉर वेजीटेबल की मदद से। सेंटर के सहयोग से फर्रुखाबाद के 35 किसानों ने फिजा, इंद्रिरा, आशा और भारत शिमला मिर्च उगाई हैं और चारों ही मिर्च सोना उगल रही हैं।

फिजा ताइवानी व इंद्रिरा थाईलैंड की प्रजाति है। भारत और आशा स्थानीय है। इन किस्मों के बीज दिल्ली व लखनऊ से मंगाकर सेंटर ऑफ एक्सीलेंस ने एक माह में एक लाख पौध तैयार की थी। इसलिए किसानों ने खेतों पर पौध सीधे लगाई। इससे 30 दिन तो बचे ही, साथ ही मिर्च भी 45 से 55 दिन में तैयार हो गई।

खबरों के अनुसार इस वर्ष जलालाबाद, गुगरापुर, उमर्दा, ठठिया, कन्नौज व छिबरामऊ क्षेत्र में सबसे ज्यादा शिमला मिर्च की खेती की गई। सेंटर ऑफ एक्सीलेंस की पौध से उगी ये पैदावार अप्रैल तक जारी रहेगी। जबकि सामान्य खेती से फरवरी तक ही शिमला मिर्च मिल पाती है। किसान इस मिर्च को 60 रुपये किलो के भाव से लखनऊ, कानपुर व आगरा जैसे बड़े शहरों में भेज रहे हैं।

सेंटर ऑफ एक्सीलेंस के अनुसार इस विधि से कम लागत व खर्च पर अधिक समय तक पैदावार होती है। सामान्य शिमला मिर्च की एक हेक्टेयर खेती में 40 हजार रुपये तक खर्च आता है, जबकि इसमें बीज, पौध, सिंचाई मिलाकर 25 हजार रुपये प्रति हैक्टेयर से अधिक खर्च नहीं आता है। मिर्च भी एक पौधे से 400 ग्राम तक निकल जाती है। जबकि सामान्य शिमला मिर्च का एक पौधा 250 ग्राम तक ही दे पाता है।

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