मालाबार युद्धाभ्यास के जरिए क्षमता को परख रही है भारत की नौसेना

नई दिल्ली. कालासागर के रास्ते हिंद महासागर में पैर जमाने के अवसर ढूंढ रहे चीन को काबू में रखने के लिए चार देशों की नौसेनाएं अरब सागर में युद्धाभ्यास में जुटी हैं। चार दिन के अभ्यास में भारत, ऑस्ट्रेलिया, जापान और अमेरिका की नौसेना हिस्सा ले रही हैं। युद्धाभ्यास को मालाबार युद्धाभ्यास नाम दिया गया है। अभ्यास शुक्रवार को समाप्त होगा। अभ्यास का पहला चरण तीन से छह नम्बर तक बंगाल की खाडी में किया गया था।

अमेरिकी निमित्ज से दो-दो हाथ कर रहा है विक्रमादित्य

दूसरे चरण के युद्धाभ्यास में अमेरिकी वॉरशिप निमित्ज के साथ भारत के विमानवाहक पोत विक्रमादित्य के दो—दो हाथ पर पूरी दुनिया की नजर है। ऑस्ट्रेलिया, भारत, जापान और अमेरिका की नौसेनाओं के बीच हो रहे अभ्यास में भारतीय नौसेना के विक्रमादित्य और अमेरिका के निमित्ज ने ज्वाइंट ऑपरेशन को अंजाम दिया। चार देशों की नौसेनाओं के अन्‍य जहाज, पनडुब्बी और हवाई जहाजों के साथ भारत और अमेरिका के युद्धपोत उच्च तीव्रता वाले नौसैनिक अभियानों को अंजाम देने में आने वाली दिक्कतों को दूर करने में जुटे हुए हैं। विक्रमादित्य के एमआईजी 29के लड़ाकू विमानों और निमित्‍ज के एफ-18 फाइटर लड़ाकू और ई2सी हॉकआई के क्रॉसडेक उड़ान ऑपरेशन और उन्‍नत वायु रक्षा अभ्‍यास में तेजी से कार्रवाई करने की अपनी क्षमता को परख रहे हैं।

दूर कर रहे हैं सतह और पानी के नीचे हथियारों के संचालन की दिक्कत

चारों देशों की नौसेना अंतर-संचालन और तालमेल बढ़ाने के लिए उन्नत सतह और पनडुब्बीरोधी युद्ध अभ्यास, सिमैनशिप कर्मिक विकास और हथियारों से फायरिंग का अभ्यास कर रहे हैं। हिंद-प्रशांत क्षेत्र में चीन की बढ़ती गतिविधियों पर लगाम लगाने के लिए चारों देशों ने क्वाड नाम से समूह बनाया है। 2017 में बनाए गए क्वॉड के सदस्य भारत, अमेरिका और जापान लगातार अभ्यास में हिस्सा लेते रहे लेकिन ऑस्ट्रेलिया बाहर रहा। इस बार ऑस्ट्रेलिया भी इस अभ्यास में शामिल है।

युद्ध अभ्यास की मालाबार श्रृंखला भारत और अमेरिका के बीच वार्षिक द्विपक्षीय नौसैनिक अभ्यास के रूप में 1992 में शुरू की गई थी। इन सालों के दौरान इसका दायरा और जटिलता लगातार बढ़ी है। लद्दाख में चीन के साथ चले आ रहे गतिरोध को देखते हुए ये अभ्यास भारत के लिए काफी अहम है।

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