नई दिल्ली. लगभग एक माह से जारी किसान आंदोलन के बीच दिल दहलाने वाली एक खबर आई है। भारत की मिट्टी मौत के जबड़ों में फंस गई है और सरकार ने ध्यान नहीं दिया तो अगली पीढ़ी को सिर्फ बंजर खेत और भूखे मरते जानवर मिलेंगे। फिलवक्त भी मिट्टी पर मंडरा रहे मौत के साये के चलते भारत में कृषि उत्पादन उस अमेरिका से चार गुना कम है जिसके पास लगभग भारत के बराबर खेती की जमीन हैं।

कृषि वैज्ञानिकों के अनुसार चीन के पास भारत से आधी ज़मीन है फिर भी उसका फसल उत्पादन भारत से तीन गुना ज्यादा है। असल में मिट्टी की ऊपरी परत पर सूक्ष्म जीव पैदा होते रहते हैं। इन जीवों की बदौलत ही खेत सोना उगलते हैं। इसके अलावा ये जीव मिट्टी का क्षरण भी रोकते हैं और फसलों को पोषण भी देते हैं। वैज्ञानिकों के मुताबिक भारत में खेती की 40 फ़ीसदी ज़मीन की मिट्टी मर चुकी है।

एक मृदा वैज्ञानिक के अनुसार मिट्टी की भी इंसानों की तरह जीवन अवधि होती है। उपजाऊ मिट्टी जीवों के भोजन के बिना मरने लगती है। असल में मिट्टी को पशुओं के मल-मूत्र, खर-पतवार, खेत में छोड़ दी गई फसलों के सड़ने से भोजन मिलता है। मिट्टी बारिश के पानी को बरकरार रखने जैसा काम करने के साथ ही भूजल को प्रदूषित होने से बचाने के फ़िल्टर का काम भी करती है। वैज्ञानिकों के अनुसार मिट्टी में जैव पदार्थों का स्तर तीन से चार फ़ीसदी से होना चाहिए, लेकिन उत्तर भारत के राज्यों की मिट्टी में जैव पदार्थ 0.2 फ़ीसदी ही है। मिट्टी में जैव तत्वों की अनुपस्थिति से फसलों की पैदावार कम तो कम होती ही है साथ ही माइक्रो न्यूट्रिएंट्स भी घट जाते हैं।

भारत में मिट्टी क्षरण की गंभीर समस्या से जूझ रही है। मिट्टी में जैव तत्व कम होने से बहुत बारिश होने पर बाढ़ आ जाती है। अगर भारत मिट्टी के स्वास्थ्य को ठीक कर ले तो प्रति हेक्टेयर कृषि पैदावार 4 टन तक हो सकती है। भारत में आधी खेती बारिश पर निर्भर है। मानसून अच्छा रहने पर पैदावार ज़्यादा और ख़राब रहने पर घट जाती है।रहा तो यह घट जाती है। मानसून की अनिश्चितता भी मिट्टी को गम्भीर नुकसान पहुंचाती है।

इससे निपटने के लिए सरकार को ज़मीन की सेटेलाइट मैपिंग कराकर मिट्टी की गुणवत्ता का विश्लेषण करवाना चाहिए। इससे यह पता चल सकेगा कि देश के किस हिस्से की मिट्टी के हिसाब से कौन सी फसल उगाई जाए। इसके अलावा ड्रोन्स की मदद से भी मिट्टी के स्वास्थ्य पर नजर रखी जा सकती है। जब तकनीक का बड़े पैमाने पर इस्तेमाल होगा तो मिट्टी की क्वालिटी सुधरने लगेगी।

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