नई दिल्ली. भारत की झीलों के आसपास रहने वाले घोंघों की इन दिनों शामत आई हुई है क्योंकि उसे चाव से खाने वाली बतखों ने देश भर की झीलों पर डेरा डाल रखा है। इनमें गेडवाल प्रजाति की बतख घोंघों के लिए काल बन गई है क्योंकि गेडवॉल उसे देखते ही चट कर जाती है।

असल में सर्दियों में एशिया भर से पक्षी प्रवास के लिए भारत आते हैं। इसलिए इन दिनों में झीलों, वैटलैंड आदि के आसपास रहने वाले कीड़े-मकौडों के साथ ही घांघे, झीलों में रहने वाली मछलियों सहित अन्य छोटे-छोटे मकोडों की जान सांसत में फंस जाती है। प्रवासी पक्षी इन्हें ढूंढ-ढूंढकर खाते हैं।

पूंछ पर काले पैच वाले गेडवॉल प्रजाति के नर बतख का शरीर सुरमई भूरे रंग का होता है। मादा भूरी एवं चित्तीदार होती है। घोंघा इसका मुख्य भोजन है। बतखों में नॉर्थ पिनटेल का सिर चॉकलेटी एवं भूरा रंग का होता है। नर के गर्दन के पास सफेद पट्टी एवं सिर के दोनों तरफ स्लेटी रंग के ऊपर सफेद धारियां होती हैं। दुम के आगे पिन के आकार के पंख होते हैं। मादा भूरे एवं गेहूंए रंग की होती है। ये शाकाहारी होती है।

इसी तरह फेरुजिनस डक के शरीर का अधिकांश भाग गहरे भूरे रंग का होता है। दुक के नीचे सफेद धब्बा एवं नर की सफेद आंखों से पहचान होती है। मादा का रंग नर से फीका एवं आंखें भूरी होती है। यह भी शाकाहारी होती है।

लेसर व्हिस्लिंग बतख उड़ते समय सीटी जैसी आवाज निकालती है। सिर का ऊपरी हिस्सा गहरा भूरा, सिर व गर्दन का बाकी हिस्सा हल्का भूरा, गले के पास सफेद रंग, कंधे व पीठ का रंग गहरा भूरा, कंधे के पंख काले बदामी रंग के, पूंछ का रंग गहरा भूरा होता है। नर व मादा एक जैसे दिखते हैं।

यूरेशियन कूट बतख का शरीर स्लेटी ब्लैक और सिर चमकदार काला होता हैं। ये कीट और जलीय वनस्पति खाती है। लिटिल ग्रीब प्रजाति की बत्तख नुकीली चोंच होने का पूरा फायदा उठाती है और झील के पानी में पनपने वाली मछलियों की दिन रात दावत उड़ाती है।

गजब की तैराक ये बतख पानी के अंदर जाकर शिकार कर लेती हैं। स्पॉट बिल्ड बतख काफी संवेदनशील और शाकाहारी होने के चलते सिर्फ बीज, अनाज, घास, एवं वनस्पति खाती है।

Leave a comment

Your email address will not be published.