नई दिल्ली. भारत लगातार ठिगना हो रहा है? नेशनल फैमिली हैल्थ सर्वे (एनएफएचएस) के आंकडे इस बात की खुलकर गवाही दे रहे हैं। अधिकांश राज्यो में ठिगने, कमजोर और कम वजन वाले बच्चों की संख्या बेतहाशा बढ़ रही है। केरल, गुजरात, महाराष्ट्र, गोवा और हिमाचल प्रदेश में कद का ठिगनापन सीमा से बाहर जा रहा है।

पूरी दुनिया में ठिगने बच्चों की सबसे अधिक संख्या भारत में है। देश के 18 राज्यों में पांच साल के कम उम्र के एक चौथाई से अधिक बच्चे ठिगने है। मेघालय में 46 प्रतिशत, बिहार में 42.9, गुजरात में 39, कर्नाटक में 35, गोवा में 26 तो केरल में 23 प्रतिशत बच्चे उम्र के मुताबिक कद में छोटे हैं।

असम में पांच साल तक के कमजोर बच्चों की दर 25 प्रतिशत मिली। गुजरात में 25 और बिहार में 23 प्रतिशत बच्चे कमजोर पाए गए। बिहार में 41 प्रतिशत, गुजरात में 40 और महाराष्ट्र में 36, गोवा में 24 और केरल में करीब 20 प्रतिशत पांच साल तक के बच्चे कम वजन वाले पाए गए। इसका मतलब है कि कमजोर बच्चे पैदा करनेवाली महिलाओं के पास पर्याप्त पोषणयुक्त आहार नहीं था।

अलबत्ता राहत की बात ये कि 18 राज्यों में दो साल से कम उम्र के 70 प्रतिशत बच्चों को बीसीजी, डिप्थीरिया, काली खांसी और टिटनेस, पोलियो, खसरा-चेचक का टीका लग चुका है। एनएफएचएस भारत में स्वास्थ्य डाटा का प्रमुख स्रोत है। इसके डाटा का इस्तेमाल स्वास्थ्य योजनाओं की प्रगति और बच्चों और महिलाओं के स्वास्थ्य में सुधार का आकलन करने में किया जाता है।

सर्वे 2019-2020 में किया गया है। इसमें देश के छह लाख घरों के आंकड़े शामिल हैं। इसके पहले चरण में 17 राज्यों और पांच केंद्र शासित प्रदेशों के आंकड़े सार्वजनिक किए गए हैं। जिन राज्यों में सर्वे किया गया, उनमें केरल, गुजरात, पश्चिम बंगाल, कर्नाटक, गोवा, हिमाचल प्रदेश, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना और पूर्वोत्तर राज्य शामिल है। दूसरे चरण में यूपी, राजस्थान, पंजाब, हरियाणा, उत्तराखंड, तमिलनाडु, जम्मू-कश्मीर और दिल्ली में सर्वे चल रहा है और उसके आंकड़े मई 2021 में जारी किए जाने की सम्भावना है।

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