सुनील शर्मा
जयपुर. आपाधापी के इस दौर में आजकल हम देख रहे है कि व्यस्त दिनचर्या में खाना खाने का कोई निश्चित समय नहीं है। फास्ट फूड के चटपटे स्वाद के कारण कई बार हम भूख ना होते हुए भी अपनी सेहत की परवाह किए बिना बहुत कुछ खा लेते हैं, जिसके कारण वजन बढ़ना और पाचन संबंधित कई बीमारियों का सामना करना पड़ता है।

आचार्य चरक ने बताया है कि कुक्षि (आमाशय) का एक भाग अन्न से, एक भाग जल से तथा एक भाग वातादि दोषों के लिए खाली छोड़ देना चाहिए। जब अच्छी तरह से भूख लगे तभी भोजन करना चाहिए और भूख से थोड़ा कम खाना चाहिए, जिससे भोजन आसानी से पच जाता है और गैस, एसिडिटी या पाचन संबंधी समस्याएं नहीं होती।

भूख से कम खाएं

आयुर्वेद में बताया गया है कि खाना हमेशा भूख से कम खाना चाहिए। जब भूख लगे तो थोड़ा पानी पीना चाहिए और यदि थोड़ा पानी पीने पर भूख शांत हो जाए तो उस समय भोजन नहीं करना चाहिए।

सुबह जरूर लें नाश्ता

सुबह का नाश्ता जागने के 2 घंटे के अंदर कर लेना चाहिए। सुबह 10:00 बजे के पहले नाश्ता कर लें। दिन का भोजन शारीरिक श्रम के अनुसार होना चाहिए। नाश्ते और दोपहर के खाने में कम से कम 3 घंटे का अंतर रहना चाहिए।

हल्का हो रात का भोजन

रात का भोजन हल्का और सुपाच्य हो। सोने के कम से कम 2 से 3 घंटे पहले डिनर कर लें। बीच-बीच में फल और ऐसे खाद्य पदार्थ ले सकते हैं,जो पचने में आसान हों।

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