नई दिल्ली. मशहूर गंगानगरी किन्नू कोरोना के असर से बच नहीं पाया है। इसी वजह से किन्नू उत्पादक परेशान हैं। विटामिन सी से भरपूर इस फल का इस समय मुख्य सीजन है। किन्नू का निर्यात कई देशों को किया जाता है। साथ ही इसे देश के कई इलाकों में भी भेजा जाता है। इस बार भी इसका निर्यात बांग्लादेश, भूटान व कई खाड़ी देशों को हो रहा है लेकिन परिवहन संबंधी दिक्कतों के चलते निर्यात की मात्रा बहुत कम है।

देश दुनिया में किन्नू की अच्छी मांग रहती है लेकिन इस बार इलाके में किन्नू की बंपर फसल होने पर भी भाव तुलनात्मक रूप से कम है। कोरोना व लॉकडाउन जैसे कारणों से उपजी परिवहन संबंधी दिक्कतों के चलते भाव नीचे हैं।

पिछले सीजन में किन्नू के बाग के सौदे 17-18 रुपये प्रति किलो की दर पर हुए। इस बार यह 12-13 रुपये प्रति किलो ही रहे। देश में किन्नू के ज्यादातर बाग पंजाब के अबोहर, फाजिल्का व उससे साथ लगे राजस्थान के गंगानगर जिले में हैं। गंगानगरी किन्नू का निर्यात खाड़ी देशों से लेकर रूस व न्यूजीलैंड तक होता है। मुंबई से लेकर चेन्नई और चंडीगढ़ तक इस किन्नू की मांग रहती है क्योंकि इसके छिलके पतले होते हैं

गंगानगर जिले में 2016-17 में जिले में 10,228 हेक्टेयर में फैले किन्नू के बागों से 2.60 लाख टन उत्पादन हुआ था। इस सीजन 2020-21 में 11,000 हेक्टेयर से अधिक इलाके में किन्नू के बागों का उत्पादन 37 लाख टन से अधिक रहने का अनुमान है। लॉकडाउन के चलते किसान व व्यापारी पहले ही आशंकित थे। बड़े ठेकेदारों ने सौदे करने से हाथ खींच लिए और जो सौदे हुए उनमें भाव कम रहे। उसके बाद किसान आंदोलन शुरू हो गए जबकि दिसंबर-जनवरी किन्नू का पीक सीजन होता है।

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