आसमान में कड़कने वाली बिजली एक बार में 50 करोड़ वोल्ट तक की ऊर्जा पैदा कर सकती है। इतने पावर की बिजली से फैराडे नामक धातु ही बचा सकती है। इस धातु से टकराकर बिजली वापस लौट जाती है।

बिजली क्यों और कैसे गिरती है, इस पर सदियों से खोज जारी है। इससे धरती पर होने वाले नुकसान को रोकने के लिए 1752 में तडित छड का आविष्कार किया गया। बिजली हमेशा सबसे ऊंची जगह पर टकराती है। इसलिए ज्यादातर चर्चों या ऊंची इमारतों में इसके लिए एक छड़ लगाई जाती है। यह धातु बिजली को जमीन के अंदर तक पहुंचा देती है।

यह एक मिथक है कि बिजली गिरने से आग के गोले जैसी आकृति बनती है, जो तबाही लाती है। वैज्ञानिकों का कहना है कि ऐसी घटना होती जरूर है लेकिन इसे कभी तस्वीरों में नहीं पकड़ा जा सका है।

डर का दूसरा नाम एस्ट्राफोबिया

कुछ लोगों को बिजली कड़कने की घटना बहुत रोमांटिक लगती है लेकिन अगर इसे सोच कर ही पसीने आने लगें तो वह शख्स एस्ट्राफोबिया का शिकार हो सकता है। बिजली से डर लगने की बीमारी को यही नाम दिया गया है। कई स्टेज शो में इस तरह की घटनाओं को दिखाया गया है। मशहूर कलाकार वॉल्टर डे मारिया ने अमेरिका में न्यू मेक्सिको में एक विशाल मैदान में स्टील के रॉ़ड लगाए हैं। बिजली गिरने से ये आकृति बनने लगती है।

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