सदियों से प्रयासरत हैं कीटाणु

नई दिल्ली. यदि खाने को अच्छी तरह से संरक्षित किया जाए तो सभी पोषक तत्वों के साथ उसे दो हजार साल तक भी ताजा रखा जा सकता है। असल में कोई भी खाना कीटाणु पनपने की वजह से खराब होता है। अगर खाने में बैक्टीरिया पैदा ही ना होने दिए जाएं तो उसे कभी भी इस्तेमाल किया जा सकता है।

इंसान सदियों से फूड प्रिज़र्वेशन यानी खाने पीने की चीज़ों को लंबे समय तक रखने के लिए तरह तरह के नुस्खे आजमाता रहा है। वह खाने को सुखाकर, उसमें नमक लगाकर, चीनी की तह लगाकर, केमिकल के ज़रिए या फिर एयर टाइट डिब्बों में संरक्षित करता रहा है। खाने को सुखाकर रखना सबसे बेहतरीन तरीक़ा माना जाता है। खाना सुखा लेने से उसमें जीवाणु पैदा होने की गुंजाइश ही खत्म हो जाती है।

हालांकि एयरटाइट डिब्बों में भी कुछ समय तक खाना सुरक्षित रहता है लेकिन एयर टाइट डिब्बों में रखने से उसमें कई ऐसे जीवाणु पैदा हो सकते हैं, जो हवा कम होने पर ही पनपते हैं। जैसे कि मांस को खराब करने वाले एनोरोबिक वर्ग के जीवाणु कम ऑक्सीजन में ही फलते फूलते हैं।

खाने को नमक लगाकर भी संरक्षित करने का तरीका लम्बे समय के लिए कारगर नहीं है, लेकिन मांस को सुखा कर और नमक लगाकर लंबे समय के लिए संरक्षित किया जा सकता है। चीनी की मोटी परत लगाकर भी खाने को लंबे समय के लिए रखा जा सकता है। ख़ालिस चीनी जीवाणु को पनपने नहीं देती। यही वजह है कि टॉफी, चॉकलेट या ज़्यादा मीठी चीजें लंबे समय तक रह पाती हैं। चीनी के साथ मेवे, दूध, स्टार्च या अंडा आदि शामिल होगा तो उसकी उम्र कम होगी।

शहद के तो कहने ही क्या? ये तो सारी उम्र खराब ही नहीं हो सकता। क्योंकि इसमें पानी की मात्रा लगभग ना के बराबर होती है और इसमें ख़ुद ऐसे प्राकृतिक संरक्षक मौजूद हैं, जो उसमें जीवाणु पैदा ही नहीं होने देते। दुनिया के सबसे पुराने शहद का नमूना मिस्र में तूतेनखामन की क़ब्र और जॉर्जिया में बड़प्पन के मकबरे में मिला हैं। ये तीन हजार साल पुराना है।ज़्यादा वसा वाली चीज़े जैसे तेल, मक्खन, घी वग़ैरह भी लंबे समय के लिए संरक्षित किए जा सकते हैं।

शराब के बारे में तो कहा ही जाता है कि शराब जितनी पुरानी हो उतनी ही अच्छी होती है। एक प्राचीन रोमन मक़बरे में दुनिया की अब तक की सबसे प्राचीन शराब की बोतल पाई गई है। ये बोतल क़रीब 17 सौ साल पुरानी है। लेकिन इसे आज तक चखा नहीं गया है। शैंपेन की सबसे पुरानी बोतलें 200 साल पुरानी हैं जिनका ज़ायक़ा आज भी लज़ीज़ है। मांस को भी ठंड और बर्फ में रखा जाए तो वह लंबे समय तक खाने योग्य रह सकता है। लेकिन मछली को बर्फ़ में लंबे समय तक रख पाना ज़रा मुश्किल होता है। बर्फ़ में ज़्यादा समय तक जमे रहने पर मछली की मांसपेशियों में कई तरह के रसायनिक परिवर्तन होने लगते हैं। जो उसके स्वाद को नष्ट कर देते हैं।

Leave a comment

Your email address will not be published.