नई दिल्ली. तंबाकू कैंसर, फेफड़ों और दिल की बीमारी का जनक माना जाता है। विश्व स्वास्थ्य संगठन इसे भारत में हर साल करीब 13 लाख लोगों की मौत के लिए जिम्मेदार मानता है। वैसे भी भारत तंबाकू का दूसरा सबसे बड़ा उत्पादक और उपभोक्ता है। एक सर्वे के अनुसार भारत की करीब 30 प्रतिशत वयस्क आबादी तंबाकू का सेवन करती है।

तंबाकू सेवन से होने वाली बीमारियों के कारण भारत को अरबों का नुकसान होता है, लेकिन भारत सरकार ने तंबाकू उत्पादों को हतोत्साहित करने की अपेक्षा एक कोड ऑफ कंडक्ट बनाया है कि स्वास्थ्य मंत्रालय के अधिकारी तंबाकू उद्योग या उनके प्रतिनिधियों के साथ व्यवसायिक गठजोड़ नहीं कर पाएंगे। यहां तक कि उनके कार्यक्रमों में मेहमान भी नहीं बन सकेंगे।

वैसे वैश्विक तंबाकू उद्योग हस्तक्षेप सूचकांक में 2020 में भारत को 100 में से 61 अंक मिले। 2019 में उसे 69 अंक मिले थे। इस सूचकांक में जिस देश को जितने अधिक नंबर मिलते हैं, उस देश के नीति निर्माण में तंबाकू उद्योग का उतना ही ज्यादा दखल माना जाता है। भारत को नवम्बर 2020 में मिले 61 नंबर इस बात का द्योतक हैं कि यहां सरकारी मशीनरी में तंबाकू उद्योग और उसकी लॉबी का बहुत अधिक दखल है।

सूचकांक में ऐसे कई उदाहरणों से भरा पड़ा है जिनमें तंबाकू उद्योग के साथ भारत सरकार के अधिकारियों की मुलाकातें और बैठकें लगातार हुई हैं। पूर्व सरकारी अधिकारियों की तंबाकू कंपनियों के बोर्डों में स्वतंत्र निदेशक के रूप में मौजूदगी भारी मात्रा में हैं। ऐसे अधिकारियों में पूर्व विदेश सचिव निरुपमा राव, पूर्व राजदूत मीरा शंकर आदि प्रमुख हैं।

इन अधिकारियों के नाम आईटीसी की वेबसाइट पर देखे जा सकते हैं। सूचकांक में बीड़ी पर जीएसटी छूट का उल्लेख भी तंबाकू उद्योग को हासिल सरकारी संरक्षण के रूप में किया गया है। सूचकांक में आरोप है कि पूरी दनिया में हर साल 80 लाख मौतों के लिए जिम्मेदार तंबाकू उद्योग ने कोरोना काल में भारत सहित पूरी दुनिया में अरबों का डोनेशन दिया। पीपीई किट से लेकर चिकित्सा उपकरण और हाईजीन उत्पाद तक बांटकर उसने सुर्खियां बटोरी। केंद्रीय सांख्यिकी मंत्रालय के औद्योगिक उत्पादन सूचकांक में जिन 23 भारतीय उद्योगों का आकलन शामिल है, उनमें तंबाकू उद्योग अधिकतम वृद्धि दर के मामले में सातवें नंबर पर है।

अकेले तंबाकू उद्योग की वृद्धि कुल औद्योगिक उत्पादन की साढ़े चार प्रतिशत की वृद्धि दर से अधिक है। भारतीय तंबाकू उत्पाद करीब 100 देशों में निर्यात किए जाते हैं। भारत चीन के बाद दूसरा सबसे बड़ा तंबाकू उत्पादक और निर्यातक देश है। ग्लोबल एडल्ट टोबैको सर्वे के एक अनुमान के मुताबिक भारत के साढ़े 27 करोड़ यानी 15 साल से ज्यादा उम्र के साढ़े 28 प्रतिशत लोगों को धूम्रपान की लत है।

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