किसानों की बदलती रणनीति से पशोपेश बढ़ा

नई दिल्ली. कृषि कानूनों पर गतिरोध जारी रहा तो केन्द्र सरकार 26 जनवरी से पहले सुप्रीम कोर्ट के कानून निलम्बन सुझाव पर अमल कर सकती है। किसानों को राजमार्गों से हटाने के लिए दायर याचिका पर सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने केन्द्र सरकार को यह सुझाव दिया था कि कानूनों पर कुछ समय के लिए अमल रोकने पर विचार किया जा सकता है।

राजनीतिक जानकारों का कहना है कि केन्द्र सरकार अभी इस कोशिश में जुटी हुई है कि कैसे भी किसानों को कानूनों में संशोधन करने के लिए तैयार कर लिया जाए ताकि कानून वापस लेने से होने वाली किरकिरी से बचा जा सके, लेकिन किसानों के 7 जनवरी के ट्रैक्टर मार्च ने सरकार की चिंताएं बढ़ा दी हैं। शुक्रवार को हुई वार्ता भी बेनतीजा रहने और किसानों के आंदोलन तेज करने के ऐलान ने सरकार को अजीब से पशोपेश में डाल दिया है।

उधर किसानों की रणनीति भी लगातार बदल रही है जिससे सरकार को ये समझ नहीं आ रहा है कि आखिर क्या किया जाए कि किसान अपने घरों को लौट जाएं। खबरें आ रही हैं कि मांग नहीं माने जाने पर किसान दिल्ली में गणतंत्र दिवस पर ट्रैक्टर चलाने के लिए महिलाओं को आगे कर सकते है। 9 जनवरी शनिवार को स्वतंत्रता से पहले किसान नेता रहे चौधरी छोटूराम की पुण्यतिथि पर दिल्ली की सीमाओं पर कई कार्यक्रम किए जाने की तैयारियों की रिपोर्ट भी सरकार के पास आई है।

इसके अलावा आंदोलन में अब अन्य राज्यों के किसानों की हिस्सेदारी बढ़ रही है। इसी के चलते महाराष्ट्र के सत्यशोधक समाज के हजारों किसानों के जयपुर-दिल्ली राजमार्ग पर पहुंचने के लिए तैयार बैठे रहने का दावा किसान नेता दर्शन सिंह ने किया है।

राजनीतिक जानकारों का मानना है कि 11 जनवरी को सुप्रीम कोर्ट में होने वाली सुनवाई में केन्द्र के रूख से साफ हो जाएगा कि इस आंदोलन का क्या हश्र होगा ? माना जा रहा है कि सरकार सुप्रीम कोर्ट के सुझावों पर विचार करने के संकेत दे सकती है।

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