नई दिल्ली. झारखंड के चतरा जिला मुख्यालय से लगभग 27 किलोमीटर दूर पितीज गांव में भूतों के डर से सैकड़ों एकड़ के खेतों में खड़ा धान सड़ रहा है लेकिन गांव वाले उसे काट नहीं रहे हैं। अंधविश्वास की जकड़ में आए ग्रामीणों का कहना है कि धान की कटाई करने से गांव पर विपत्ति आ जाएगी।

असल में पाहन का बहुत असर है। गांव का मालिक पूजा नहीं करता है तो अनिष्ट की आशंका बनी रहती है। एक बार पाहन पूजारी ने पूजा नहीं की थी, तो यहां के लोगों ने भूत के डर से खेती नहीं की। धान कटाई करने से पहले लोग गांव के मालिक से ग्राम देवता की पूजा कराते हैं।

ग्रामीण इस आशंका से ग्रस्त हैं कि अगर गांव के मालिक ने पूजा नहीं की तो धान कटाई से अप्रिय घटना घट सकती है। अनहोनी के इसी डर से लोगों ने धान खेतों में ही बर्बाद होने के लिए छोड़ दिया है। गांव वालों का मानना है कि धान की कटाई करने से इस गांव का भूत उनका कुछ ना कुछ बुरा जरूर करेगा।

हुआ ये है कि हर साल होने वाली पूजा इस बार जय गुरुदेव को मानने वाले और स्थानीय लोगों के बीच एकता नहीं होने से नहीं हो पा रही है। जिसके कारण यहां धान की कटाई नहीं की जा सकेगी। अंधविश्वास में फंसे ग्रामीण मानते हैं कि अगर कोई खेतों से धान काटकर घर ले जाता है तो भूत उसके घर जाकर कुछ ना कुछ अशुभ कार्य कर देगा।

गांव की एक सामाजिक कार्यकर्ता का कहना है कि पितीज गांव के लोग अभी भी अंधविश्वास में जी रहे हैं। वहां के लोगों के बीच जल्द ही अंधविश्वास के विरुद्ध जागरूकता अभियान चलाकर धान की कटाई कराई जाएगी। आसपास के गांवों में धान की कटाई देख ग्रामीण थोड़े विचलित भी हो रहे हैं।

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