जयपुर. राजस्थान में एक जनवरी, 2019 से 20 सितंबर, 2020 के बीच अवैध रेत खनन करने वालों के खिलाफ 4,417 एफआईआर दर्ज की गई। 5,044 लोग गिरफ्तार किए गए और 1,58,637 टन रेत जब्त की गई। इस अवधि में रेत माफिया ने 109 सरकारी अधिकारी व कर्मचारियों पर हमला किया। जिनमें से दो की मौत हो गई। जबकि नागरिकों पर हमले में 10 लोग घायल हो गए और तीन की मौत हो गई।

बहुमूल्य प्राकृतिक संसाधनों की बंदरबाट

ये आंकडे बता रहे हैं कि राजस्थान में बजरी खनन करने वाले ना तो सरकार की परवाह करते हैं और ना ही पुलिस से डरते हैं। इन्हीं आंकड़ों के चलते सुप्रीम कोर्ट की ओर से नियुक्त सेंट्रल इम्पावर्ड कमेटी (सीईसी) ने राज्य सरकार पर आरोप लगाया है कि बहुमूल्य प्राकृतिक संसाधनों की बंदरबाट में उसने अप्रत्यक्ष रूप से भूमिका निभाई है।

बजरी की बिक्री एवं परिवहन को वैध कर दिया !

बजरी खनन निगरानी के लिए बनाई गई समिति ने राज्य सरकार द्वारा पर्यावरणीय मंजूरी दिए जाने पर भी सवाल उठाया है। कोर्ट ने पिछले साल फरवरी में सीईसी को निर्देश दिया था कि वह बजरी खनन से संबंधित आरोपों पर विचार कर इसे रोकने के लिए एक रिपोर्ट पेश करें। समिति ने कोर्ट को सौंपी अपनी रिपोर्ट में कहा है कि सीईसी को यह निष्कर्ष निकालने में कोई संकोच नहीं है कि खातेदारी (कृषि/राजस्व) भूमि में खनन पट्टों के मुद्दे ने राज्य में नदी के तल से अवैध रूप से निकाली गई बजरी की बिक्री एवं परिवहन को वैध कर दिया है।

परमिट का दुरूपयोग किया गया !

रिपोर्ट में राजस्थान माइनर मिनरल कंसेशन रूल्स में संशोधन पर भी सवाल उठाया गया है। रूल्स में प्रावधान किया गया है कि केवल सरकार या सरकार द्वारा समर्थित कार्यों के लिए खातेदारी भूमि में खनन के लिए अल्पकालिक परमिट दिए जा सकते हैं। रिपोर्ट में कहा गया है कि इन परमिट का दुरूपयोग किया गया और गैर कानूनी बजरी खनन किया गया। इस तरह के 194 खनन परमिट में से 192 को मंजूरी नवंबर 2017 में सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद दी गई। रिपोर्ट के अनुसार रेत खनन पर रोक लगाने वाले सुप्रीम कोर्ट के आदेश से पहले 2016-17 में राजस्थान में बजरी का खनन 57 एमएमटी था, जो 2019-20 में घटकर पांच एमएमटी हो गया।

इधर राज्य सरकार का कहना है कि कानूनी खनन से सिर्फ 25-30 फीसदी की मांग पूरी हो पाती है। इसी अंतर के चलते गैर कानूनी बजरी खनन तेजी से बढ़ रहा है। अब सीईसी ने सिफारिश की है कि नदी के पांच किलोमीटर के भीतर स्थित सभी खातेदारी लीज को खारिज किया जाना चाहिए।

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