नई दिल्ली. अगर सही तरीके से खाए जाएं तो अखरोट और बादाम जीवन को दीर्घायु तक ले जाते हैं, लेकिन शर्त यही है कि उन्हें वैज्ञानिक ढंग से खाया जाए।
मेवे सेहत के लिए अच्छे होते हैं लेकिन इन्हें जरूरत से ज्यादा भी नहीं खाना चाहिए। काजू, बादाम या अखरोट को खाने का सही तरीका इस्तेमाल किया जाए तो शरीर में ब्लड शुगर और लिपिड मेटाबोलिज्म के पैरामीटर पर असर होता है जिससे टाइप टू डायबिटिज के अलावा दिल की बीमारियों और हाई ब्लड प्रेशर का जोखिम कम होता है। बादाम जीवन लंबा करता है।

म्यूनिख मेडिकल कॉलेज में अखरोट पर की गई स्टडी में भाग लेने वाले एक व्यक्ति ने आठ हफ्तों तक हर दिन एक मुट्ठी यानि 43 ग्राम अखरोट खाया। उसके बाद तुलनात्मक अध्ययन के लिए आठ हफ्ते तक कोई अखरोट नहीं। हर दिन बराबर कैलोरी का सेवन। अखरोट खाने से पहले और उसके बाद मेडिकल जांच के नतीजों ने हैरान कर दिया। अखरोट का सबसे महत्वपूर्ण असर खून में मौजूद वसा पर था। खराब कोलेस्ट्रॉल समझे जाने वाले एलडीएल में अखरोट की वजह से 7 प्रतिशत की कमी आई।

चिकित्सा विज्ञानियों के अनुसार नियमित रूप से अखरोट खाने वाले मरीजों को दिल का दौरा कम पड़ता है। एलडीएल कोलेस्ट्रॉल दिल की बीमारियों के मामले में अत्यंत महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। आम तौर पर बादाम और अखरोट को कैलोरी बम कहा जाता है। अखरोट में 65 फीसदी फैट और 15 प्रतिशत प्रोटीन होता है।

इस बात के सबूत मिले हैं कि अखरोट खाने पर शरीर के वजन पर सकारात्मक असर पड़ता है और यह वजन कम करने में मदद करता है। इसकी एक महत्वपूर्ण शर्त यह है कि बादाम सामान्य खाने के अलावा नहीं, बल्कि खाने के किसी हिस्से को छोड़कर लिया जाए।

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