नई दिल्ली. जिस पेपर कप को सोसायटी ने प्लास्टिक कप का स्वच्छ विकल्प मानकर अंगीकार किया है, वह पैलेडियम, क्रोमियम, कैडमियम जैसे जहरीले भारी धातु और कार्बनिक यौगिक का वाहक है। इन विषाक्त पदार्थों को निगलने से स्वास्थ्य पर भारी दुष्प्रभाव पड़ता है।
हाल ही शोधकर्ताओं ने डिस्पोजेबल पेपर कप में गर्म पेय पदार्थ पीने से होने वाले दुष्प्रभावों को स्वास्थ्य के लिए काफी गम्भीर माना है। रिसर्च में पाया गया है कि डिस्पोजेबल पेपर कप में गर्म पेय पदार्थ पीना सही नहीं है। इन पेपर कप से माइक्रोप्लास्टिक सहित कई हानिकारक तत्व निकलते हैं।
पेपर कप एक महीन हाइड्रोफोबिक फिल्म से तैयार किए जाते हैं, जो प्लास्टिक से बनते हैं। अध्ययन में पाया गया कि पेपर कप में 15 मिनट तक गर्म पानी रखने से माइक्रोप्लास्टिक की पतली परत क्षीण हो जाती है। एक पेपर कप में 85 से 90 डिग्री सेल्सियस तापमान वाला 100 मिलीलीटर गर्म तरल पदार्थ अगर 15 मिनट तक रहता है तो उसमें 25 हजार माइक्रोन आकार के माइक्रोप्लास्टिक के कण निकलते हैं अर्थात दिन में तीन बार पेपर कप में चाय या कॉफी पीने वाला अपने शरीर के भीतर लगभग 75 हजार सूक्ष्म माइक्रोप्लास्टिक के कण पहुंचा रहा है। इससे आंखों की रोशनी तक नष्ट होने का खतरा रहता है। अध्ययन बताता है कि इसे इस्तेमाल से पहले सावधानीपूर्वक विचार करने की आवश्यकता है।

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