नई दिल्ली. दुनिया भर में कई लाख लोगों को मौत की ​नींद सुला चुका कोरोना उन लोगों को गंजा बना रहा है जिन्हें कोरोना संक्रमण का सामना करना पड़ा।

एक शोध में पाया गया है कि न्यूयॉर्क शहर में लोगों के बाल पहले से ज्यादा झड़ रहे हैं। शहर के अश्वेत आबादी वाले इलाकों में बालों के रोग टेलोजेन इफ्लूवियम (टीई) में भारी वृद्धि हुई है। अमेरिका के जर्नल ऑफ द अमेरिकन एकेडमी ऑफ डर्मेटोलॉजी में छपे शोध के अनुसार नवंबर 2019 से फरवरी 2020 के बीच टीई के मात्र 0.4 प्रतिशत ही मामले थे, जबकि अगस्त तक यह बढ़कर 2.3 प्रतिशत हो गए।

रिपोर्ट के अनुसार अभी यह साफ नहीं है कि टीई की असली वजह कोरोना महामारी के कारण लोगों में मनोवैज्ञानिक रूप से हुए बदलाव हैं या फिर यह अत्यंत भावुक तनाव का नतीजा है। डॉक्टरों का कहना है कि अक्सर किसी सदमे के करीब तीन महीने बाद लोगों में टीई के लक्षण दिखते हैं। ऐसे में मुमकिन है कि न्यूयॉर्क में बड़े स्तर पर कोरोना फैलने से लोगों को भीषण तनाव हुआ हो, जिसके तीन महीने बाद बाल गिरने के मामलों में वृद्धि देखी गई।

कोरोना संक्रमण से मौत का शिकार हुए 19 लोगों के मस्तिष्क पर शोध में शोधार्थियों ने पाया कि कोरोना वायरस के कारण सबसे ज्यादा नुकसान ओल्फैक्ट्री बल्ब को होता है। यही वह कोशिकाएं हैं जो गंध महसूस करती हैं। शोधार्थियों ने पाया कि कुछ मरीजों के दिमाग के कुछ हिस्सों की रक्त कोशिकाएं जम गई तो किसी की कोशिकाओं में लीकेज भी देखा गया। शोधार्थियों को जहां जहां भी लीकेज मिला, वहां इम्यून सिस्टम में खराबी भी मिली। लेकिन हैरानी की बात ये कि दिमाग में इन नुकसानों के बावजूद कोरोना वायरस जिंदा अथवा ​मृत अवस्था में नहीं मिला।

द न्यू इंग्लैंड जर्नल ऑफ मेडिसिन में छपी एक रिपोर्ट के अनुसार अमेरिका की नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ न्यूरोलॉजिकल डिसऑर्डर्स एंड स्ट्रोक के डॉक्टरों की टीम ने दिमाग में जिस तरह का नुकसान देखा, वैसा आम तौर पर स्ट्रोक या फिर न्यूरो-इंफ्लेमेटरी रोगों में ही देखा जाता है।

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