नई दिल्ली. दिग्गज किसान नेता सर छोटूराम के पौत्र और पूर्व केन्द्रीय मंत्री वीरेन्द्र सिंह ने भाजपा की चिंता बढ़ा दी है क्योंकि उन्होंने सरकार और भाजपा के इस दावे का समर्थन करने से इनकार कर दिया है कि तीन नए कृषि कानूनों से किसानों का भाग्य बदल जाएगा और वे भविष्य में मालामाल हो जाएंगे।

पिछली मोदी सरकार में केन्द्रीय मंत्री रह चुके भाजपा के वरिष्ठ नेता बीरेंद्र सिंह ने केंद्र के तीन नए कृषि कानूनों के खिलाफ जारी किसान आंदोलन को ये कहते हुए समर्थन दिया है कि किसानों के साथ खड़ा होना उनकी नैतिक जिम्मेदारी है। वीरेन्द्र स्वतंत्रता से पहले के दौर में किसान हितों के लिए लड़ने वाले सर छोटू राम के पौत्र हैं। उनके बेटे बृजेंद्र भाजपा के सांसद हैं। वीरेन्द्र ने समर्थन देते हुए कहा कि किसानों को इस बात का डर है कि नए कृषि कानूनों से उनकी आर्थिक अवस्था प्रभावित हो सकती है।
वीरेन्द्र ने कहा कि उन्होंने राजनीति में जो कुछ भी हासिल किया है वह सर छोटू राम का पोता होने की वजह से ही सम्भव हो पाया।

हरियाणा के प्रभावशाली जाट नेता वीरेन्द्र ने कहा कि आज किसानों की लड़ाई में उनके साथ खड़े होना उनकी नैतिक जिम्मेदारी है। इसलिए इस लड़ाई को समर्थन देने का फैसला किया है। उन्होंने कहा कि वह और उनके समर्थक दिल्ली से लगने वाले हरियाणा के जिलों में सांकेतिक अनशन करेंगे। सिंह ने समर्थकों के साथ रोहतक में चौधरी छोटू राम विचार मंच के बैनर तले धरना भी दिया।

चौधरी वीरेन्द्र के किसानों के समर्थन में खड़े होने से केन्द्र सरकार और भाजपा के समक्ष अजीब सी मुश्किल खड़ी हो गई है क्योंकि सर छोटूराम का पोता होने की वजह से पंजाब और हरियाणा के किसानों के बीच उनकी खासी हैसियत है और इन्हीं दोनों राज्यों के किसान इस आंदोलन की अगुवाई कर रहे हैं। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि वीरेन्द्र सिंह का यह कदम दोनों राज्यों के किसानों को आंदोलन तेज करने के लिए उकसा सकता है जिससे भाजपा के इस दावे की हवा निकल सकती है कि किसान आंदोलन के पीछे विपक्षी दलों का हाथ है।

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