भारत की चिंताओं में वृद्धि

नई दिल्ली. चीन की एक ताजा हरकत ने भारत के सुरक्षा विशेषज्ञों का ध्यान अरुणाचल प्रदेश की ओर खींच लिया है। विशेषज्ञों के अनुसार चीन न्यूक्लियर मिसाइलों के स्थान पर पारम्परिक मिसाइलों को भारतीय सीमा के पास तैनात करना चाहता है और इसके लिए वह सिचुआन-तिब्बत रेलवे प्रोजेक्ट की यान-लिंझी रेलवे लाइन को पूरा करने में जुटा हुआ है।

नहीं रहेगी न्यूक्लियर मिसाइलों की जरूरत

इस रेलवे लाइन के जरिए चीन पारम्परिक मिसाइलें भारत की सीमा तक ला सकता है। इससे उसे भारत के साथ युद्ध होने की स्थिति में न्यूक्लियर मिसाइलों की जरूरत नहीं रहेगी। चीन का ये पैटर्न कज़ाकिस्तान, किर्गिस्तान जैसी जगहों पर पूर्व में देखा गया है। चीन पहले रेलवे लाइन बिछाता है। इससे उसकी मिसाइल क्षमता बढ़ जाती है। चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने हाल ही सिचुआन-तिब्बत रेलवे प्रोजेक्ट को जल्द से जल्द पूरा करने के निर्देश दिए हैं। इस प्रोजेक्ट की यान-लिंझी रेलवे लाइन चीन के सिचुआन प्रांत से तिब्बत के लिंझी को जोड़ेगी। ये लाइन अरूणाचल प्रदेश की सीमा के क़रीब है।

48 से घटकर 13 घंटे का रह जाएगा सफर

चीनी सरकारी मीडिया ग्लोबल टाइम्स के मुताबिक पूरा प्रोजेक्ट 47.8 अरब डॉलर का है। इस लाइन से सिचुआन की राजधानी चेंगदू से तिब्बत के ल्हासा तक का सफर 48 घंटे से घटकर 13 घंटे का हो जाएगा। लिंझी इलाक़ा अरूणाचल प्रदेश के पास है। जानकार कहते हैं कि इस इलाक़े में भारत का एक बड़ा पानी का स्रोत ब्रह्मपुत्र नदी है। इसलिए भारत को इस रेलवे प्रोजेक्ट को अपनी चिंता के दायरे में रखना चाहिए। प्रोजेक्ट पूरा होने के बाद इलाक़े में चीनी सेना की आवाजाही बढ़ जाएगी। इससे चीन अपने टैंक और मिसाइलों को तुरंत भारतीय सीमा तक लाने में सक्षम हो जाएगा।

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