नई दिल्ली. केन्द्र सरकार ने साफ किया है कि वह फ्रंटलाइन वर्कर्स को लगाए जाने वाले करीब तीन करोड़ टीकों का खर्च उठाएगी। इसके लिए राज्यों को एक पाई भी नहीं देनी होगी, लेकिन शेष 27 करोड़ लोगों के टीकाकरण का खर्च कौन उठाएगा, राज्य या केन्द्र सरकार! इस सवाल का जवाब अभी नहीं मिल पाया है।

फ्रंट लाइन वर्कर्स के टीके का खर्च उठाने की घोषणा प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने मुख्यमंत्रियों के साथ आनलाइन बैठक में की। पहले फ़ेज़ में तीन करोड़ लोगों को कोरोना का टीका लगाया जाएगा और इसका सारा ख़र्च केंद्र सरकार उठाएगी।

मोदी ने कहा कि 16 जनवरी से भारत में दुनिया का सबसे बड़ा टीकाकरण प्रोग्राम शुरू किया जाएगा। भारत के लगभग सभी ज़िलों में ड्राई रन किए जा चुके हैं। भारत में बनी दो वैक्सीन को आपात स्थिति में इस्तेमाल की मंज़ूरी दी गई है।

प्रधानमंत्री ने कहा कि कोरोना का टीका सबसे पहले उन लोगों को दिया जाएगा जो फ्रंटलाइन वर्कर्स हैं। प्रधानमंत्री के अनुसार सब जोड़कर देखा जाए तो कुल मिलाकर ऐसे लोगों की तादाद क़रीब तीन करोड़ है और इन लोगों के टीकाकरण के ख़र्च का बोझ केंद्र सरकार उठाएगी। राज्यों को इस पर कोई पैसा नहीं देना होगा। सरकार का अगले कुछ महीनों में 30 करोड़ लोगों को टीका देने का इरादा है।

प्रधानमंत्री ने कहा कि दूसरे फ़ेज़ में उन लोगों को प्राथमिकता दी जाएगी जिनकी उम्र 50 साल से ज़्यादा है। 50 साल से कम उम्र के को-मॉर्बिडिटी वाले लोगों को भी टीका दिया जाएगा। प्रधानमंत्री ने राजनेताओं से अपील की कि वो अपना नंबर आने के बाद ही टीका लगवाएं।

इस बीच महाराष्ट्र सरकार के एक मंत्री ने कहा है कि सबसे पहले प्रधानमंत्री को टीका लगवाना चाहिए। कोरोना टीका को लेकर लोगों के मन में कई तरह की शंकाएं हैं। प्रधानमंत्री ख़ुद टीका लगवा कर शुरुआत करें ताकि लोगों का शक दूर हो जाए। इधर सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ़ इंडिया ने कहा है कि उसके टीका के एक डोज़ की क़ीमत दो सौ रुपए होगी। कंपनी का दावा है कि उसे भारत सरकार की तरफ़ से टीके के एक करोड़ 10 लाख डोज़ बनाने का ऑर्डर मिल गया है।

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